कासगंज। पटियाली इलाके के गंगा के तटीय गांवों में लगातार बाढ़ के बाद किसानों को राहत की उम्मीद जगी है। शनिवार को गंगा के जलस्तर में करीब 17 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई, जिससे कई इलाकों से पानी की निकासी शुरू हुई।
गंगा में पानी की कटौती का असर हरिद्वार, बिजनौर और नरौरा से आने वाले प्रवाह में भी कम होने से पड़ा। इससे राजेपुर कुर्रा, नगला दुर्जन, नगला खना, नगला नरपत, नगला दिपी, नगला जयकिशन, मूंझखेड़ा और नगला जैली जैसे बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी घटने लगा है। किसानों का मानना है कि पानी कम होने से फसलों के मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
फसलों को हुआ व्यापक नुकसान
किसानों ने बताया कि लगातार पानी भरा रहने से मक्का, बाजरा, उड़द, धान, गन्ना एवं तिलहन फसलों को काफी क्षति हुई है। खादर के खेतों में अभी भी पानी भरा होने के कारण फसल क्षति का सर्वेक्षण शुरू नहीं हो पाया है। कई खेतों में बर्बादी की आशंका बनी हुई है और किसान मुआवजे के भरोसे बैठे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार जुलाई और अगस्त में बाढ़ का प्रकोप बहुत अधिक रहा था। 12 सितंबर के बाद जब पानी कम होने लगा तो कुछ राहत मिली थी, लेकिन चार दिन पहले गंगा फिर उफनी और पहले प्रभावित हुए गांव पुनः जलमग्न हो गए थे। अब फिर जलस्तर घटने से हालत में सुधार दिखाई दे रहा है, पर खेतों में भरा पानी पूरी तरह खाली नहीं हुआ है।
किसानों का कहना है कि मुआवजा मिलना जरूरी है ताकि वे फसल के हुए नुकसान को आंशिक रूप से भर सकें। उन्होंने प्रशासन से तेजी से सर्वे कर मुआवजे की रिक्ति पूरी करने की मांग की है। फिलहाल सर्वे कार्य खेतों में पानी भरे होने के कारण बाधित है।
अब आगे क्या होगा, इसका फैसला प्रशासन की सर्वे टीमों के मैदान में उतरने पर निर्भर है। जिन क्षेत्रों से पानी निकासी पूरी होगी, वहां सर्वे तेज गति से किया जाएगा और मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। किसान प्रशासन से तुरंत सर्वे शुरू कराने और टूटे फसलों का संवेदनशील मूल्यांकन करने की अपील कर रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला

