कासगंज। गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते किलौनी, किसौल और सुन्नगढ़ी क्षेत्र की गोलामणि को बचाने के लिए सिंचाई विभाग की टीम तीन दिन से लगातार कटानरोधी कार्य कर रही है। शनिवार को गंगा का जलस्तर कम होने से काम में तेजी आई और फिलहाल गोलामणि को कटान से सुरक्षित कर लिया गया।
सिंचाई विभाग ने पूरे दिन कटानरोधी कार्य कराया। अब तक रेत के 30 हजार बैग कटान प्रभावित इलाकों में लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा परक्यूपाइन स्टड और बंबूक्रेट का भी इस्तेमाल किया गया ताकि रेत के बैगों के साथ मिलाकर कटान रोका जा सके।
तीव्र कटान का हाल
तीन दिन तक गंगा की धारा ने गोलामणि पर तीव्रता से कटान किया। मणि की भूमि और विशाल वृक्ष गंगा में समा गए। मणि से गंगा की धारा 5-6 मीटर दूर तक जा पहुंची थी, जिससे गांवों की जमीन खतरे में आ गई थी। जलस्तर कम होने पर कटानरोधी उपाय प्रभावी साबित होने लगे हैं और फिलहाल स्थिति नियंत्रित मानी जा रही है।
ग्रामीण इसपर चिंतित हैं और उन्होंने पक्के उपाय की मांग की है। बबलू ने बताया, “भले ही कटान अब रुकने लगा है, लेकिन यह आपदा बड़ी है। तीन गांव के के लिए खतरा बनी है। ठोस उपाय कटान रोकने के लिए होने चाहिए।” म्यांसुर के विमल राघव ने कहा, “अब यह इलाका कटान के लिए बेहद संवेदनशील हो गया है। पत्थरों का बांध बनाया जाना जरूरी है क्योंकि गंगा की धारा परिवर्तन ले चुकी है। लगातार गांव की ओर धारा का रुख बना हुआ है।”
एसडीओ, सिंचाई संदीप जैन ने कहा, “गोलामणि और किलौनी इलाके में कटानरोधी कार्य निरंतर जारी हैं। अब गोलामणि के लिए कोई खतरा नहीं है।” उन्होंने बताया कि विभाग बड़ी परियोजना तैयार करके कटान रोकेगा और इसके लिए प्रस्ताव बनाया जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्थायी उपायों के साथ-साथ पक्के बांध या पत्थरों का स्थायी ढांचा चाहिए ताकि आने वाले समय में फिर से कटान की स्थिति न बने। प्रशासन ने फिलहाल सतर्कता बरत रहे काम जारी रखने का आश्वासन दिया है।
स्रोत: अमर उजाला

