लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जौहर ट्रस्ट जांच में जल्द ही अहम खुलासे होने वाले हैं। जांच से यह पता चला है कि ट्रस्ट का नियंत्रण और संचालन आजम खां और उनके परिवार के सदस्यों के हाथ में था।
ईडी ने पाया है कि रामपुर की कई निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों को सरकारी ठेके दिए गए और बाद में सरकारी बजट का इस्तेमाल ट्रस्ट की संपत्तियां बनाने में हुआ। जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स के जरिए सरकारी अनुबंध से मिलने वाली करीब 86 करोड़ रुपये की राशि का दुरुपयोग किया गया।
फर्जी दानदाताओं-फर्मों की सूची
आयकर जांच में ट्रस्ट को दान देने वालों का असल पता नहीं चल सका। जांच में जिन फर्मों और व्यक्तियों के नाम सामने आए, उनमें ये शामिल हैं:
- लखनऊ की पिरामिड कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स
- मुरादाबाद की सालार ओवरसीज लिमिटेड
- दिल्ली की एआर एजूकेशन ट्रस्ट
- नोएडा की अर्थ इंफ्राटेक
- दिल्ली की रेमिगेट इंफा डेवलपर्स
- रॉयल इम्पोरिया इंफ्राटेक
- मुरादाबाद की फैजा परवीन
- बहराइच के मोहम्मद हसीब
- रोबोट विनिमय प्राइवेट लिमिटेड
- वंडर सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड
- ड्रीम ऑफ पर्ल रियलिटी एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड
इसी के साथ जांच में उन फर्मों की भी पहचान हुई जो आजम खां के मंत्री रहते हुए जल निगम के अधिकतर सरकारी ठेके लेते थे। इनमें एक प्रमुख नाम आफताब का बताया गया है। ईडी अब इन फर्मों के संचालकों को तलब करेगी और यह पता लगाएगी कि ठेकों के बदले में जौहर ट्रस्ट को कितना दान मिला।
जांच के अगले चरण में ट्रस्ट के पदाधिकारियों से सरकारी विभागों के बजट के दुरुपयोग, सरकारी जमीनों पर कब्जे, मस्जिद और समाजवादी पार्टी कार्यालय के निर्माण तथा फर्जी दानदाताओं के खातों में जमा करोड़ों रुपये के स्रोत के बारे में विस्तृत पूछताछ की जाएगी। साथ ही ट्रस्ट में शामिल आजम खां के परिवार की भूमिका पर भी गहनता से सवाल पूछे जाएंगे।
आगे क्या होगा
ईडी की कार्रवाई के तहत तलब किए जाने वाले व्यक्तियों और फर्मों से दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड मांगे जाएंगे। जिन मामलों में साक्ष्य मजबूत होंगे, वहां आगे की कानूनी कार्यवाही की संभावना है। स्थानीय लोग और लाभार्थी भी इस जांच से प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि ट्रस्ट से जुड़ी संपत्तियों और परियोजनाओं की वैधानिकता पर अब पुनर्विचार होगा।
स्रोत: अमर उजाला

