महराजगंज। जिले के साइबर क्राइम थाना ने एक अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच साइबर अपराध के खिलाफ चलाए गए अभियान में कुल 1.53 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज कराई है और 37.38 लाख रुपये पीड़ितों के खातों में वापस कराए हैं। इस अवधि में पुलिस ने 1,886 शिकायतों पर कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर मिली शिकायतों में कुल 3.80 करोड़ रुपये की ठगी की जानकारी सामने आई। साइबर क्राइम थाना टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 1.53 करोड़ रुपये फ्रीज करवाए और एमआरएम पोर्टल के माध्यम से 37.38 लाख रुपये आवेदकों को वापस कराए।
गिरोहों और संसाधनों पर कार्रवाई
साइबर ठगी के साथ ही संगठित गिरोहों पर भी छापेमारी की गई। अवैध सिम बॉक्स के जरिए अपराध करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। तेलंगाना की ऑनलाइन क्राइम अगेंस्ट वुमेन एंड चिल्ड्रेन (ओसीडब्ल्यूसी) रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर चारों आरोपियों को जेल भेजा गया।
एटीएम हॉट‑स्पॉट की जांच में ठगी और अवैध निकासी के मामलों में 10 अभियोग दर्ज किए गए और 10 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। फर्जी दस्तावेज पर सिम जारी कराने और उनके इस्तेमाल के मामलों में 17 प्राथमिकी दर्ज की गईं। फर्जी चेक के इस्तेमाल के एक मामले में भी एक आरोपी पर मुकदमा कायम किया गया।
डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए अपराधियों के दोबारा उपयोग के लिए रखे गए संसाधनों पर भी कदम उठाए गए। इस दौरान 1606 मोबाइल नंबर और 2204 मोबाइल आईएमईआई नंबर ब्लॉक कराए गए ताकि उनकी वरिष्ठता अपराध में न हो सके।
स्थानीय लोगों के लिए पुलिस ने रोकथाम और शिकायत के निर्देश भी दिए हैं। “साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करें और नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराएं। समय से सूचना मिलने पर ठगी की रकम फ्रीज कराने और वापस कराने की संभावना बढ़ जाती है।” – शक्ति मोहन अवस्थी, पुलिस अधीक्षक
पीड़ितों को कहा गया है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या लेनदेन की सूचना तुरंत दें और बैंक या मोबाइल सेवा प्रदाता के साथ-साथ साइबर थाने को भी जल्द से जल्द बताएं। आगे भी थाना ऐसे मामलों पर सतत निगरानी और कार्रवाई जारी रखेगा।
स्रोत: अमर उजाला

