महोबा। 2 अक्टूबर को कस्बा कुलपहाड़ में चल रहे जलविहार मेला महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। मौसमी शाम में स्थानीय और बाहर से आए कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
सोमवार की शाम को मंच पर राजधानी लखनऊ से आए कवि प्रख्यात मिश्रा ने देशभक्ति पर कविता सुनाई। उन्होंने “देश के तिरंगे तेरा रंग धुंधला पड़े न, इसलिए अपना सुहाग दे रही हूं मैं,” सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कवियों की विविध प्रस्तुतियाँ
कवयित्री वंदना श्रीवास्तव दिल्ली से आईं और उन्होंने बेटी पर भावुक कविता प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, “आंगन का शृंगार है बेटी खुशियों का अंबार है बेटी, जीने का अधिकार न छीनो जीवन का आधार है बेटी…” इस पंक्ति पर दर्शकों ने तालियों से अधिक समर्थन जताया। सूरज पंडित लवकुशनगर ने धर्म और सनातन पर अपने विचार कविता के माध्यम से रखे।
अन्य कवियों ने सामाजिक और राजनीतिक विषयों को भी उठाया। रीतेश पटैरिया श्रीनगर ने सेक्युलर फाइबर के मुद्दों पर कविता पेश की। कामता माखन रीवा ने गरीबी और देशभक्ति का तीखा स्वर रखा। अभिराम पाठक छतरपुर ने देश के शौर्य और विषमताओं पर कविता प्रस्तुत की।
कवयित्री अंचल शर्मा जालौन की प्रस्तुतियाँ भावनात्मक रहीं और उन्होंने श्रोताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखा। कवि मधुप श्रीवास्तव की व्यंग्यात्मक रचना में स्थानीय राजनीतिक स्थिति पर तीखा व्यंग्य था। कार्यक्रम में विविध शैली की कविताओं ने आयोजन को रंगीन बना दिया।
कार्यक्रम का संचालन नितेंद्र चौबे, कुलपहाड़ ने किया। आयोजन में स्थानीय लोग और आसपास के गांवों से आए दर्शक शामिल रहे। अगले चरण में मेले की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और भी चलेंगी, जिससे कला और लोकसंस्कृति को मजबूती मिलेगी।
स्रोत: अमर उजाला

