महोबा। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने परीक्षा से पहले कमजोर विद्यार्थियों की कमियों को स्कूल स्तर पर ही दूर करने का निर्देश जारी किया है। यह व्यवस्था हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के छात्रों के बोर्ड परीक्षा प्रदर्शन को सुधारने के मकसद से लागू की जाएगी।
कक्षा परीक्षाओं में हुए प्रदर्शन के आधार पर विद्यार्थियों की कमियों का पता विषय, अध्याय और प्रश्न के अनुसार लगाया जाएगा। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने शिक्षक व स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि कमजोर विद्यार्थियों का चयन सिर्फ कम अंक के आधार पर न किया जाए। शिक्षकों को यह देखना होगा कि विद्यार्थी को किस विषय या किस अध्याय में लगातार परेशानी हो रही है।
तैयारी के कदम
- मॉडल पेपर और अभ्यास प्रश्न हल कराए जाएंगे।
- पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास कराया जाएगा।
- निर्धारित समय में पेपर पूरा करने का अभ्यास कराया जाएगा।
- अतिरिक्त अभ्यास व मार्गदर्शन के बाद कमजोर छात्रों की नियमित समीक्षा व दोबारा मूल्यांकन होगा।
बोर्ड का मानना है कि विद्यार्थियों की समस्याएँ अलग-अलग होती हैं। उदाहरण के लिए कुछ बच्चों को गणित के विशेष अध्याय में दिक्कत आती है, जबकि कुछ विज्ञान के सवाल हल करने में परेशान रहते हैं। इसी कारण से तैयार किए गए अभ्यासों को विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार कराया जाएगा।
स्कूल स्तर पर शिक्षकों को अब यह जवाबदेही दी जाएगी कि वे लगातार наблюित कर के उन अध्यायों पर अधिक ध्यान दें जहाँ बच्चे अटकते हैं। आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कक्षाएँ और मार्गदर्शन दिया जाएगा ताकि विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
अंतिम रूप से अतिरिक्त अभ्यास कराने के बाद उन विद्यार्थियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। यह प्रक्रिया परीक्षा से पहले स्कूलों में ही लागू होगी और तैयारी की प्रगति की नियमित समीक्षा होती रहेगी।
स्रोत: अमर उजाला

