मुरादाबाद। लगातार हो रही बारिश के बाद गन्ने के खेतों में पानी भरने से तेंदुए आबादी के और करीब आने लगे हैं। कांठ-ठाकुरद्वारा के कई गांवों में हालात tense बने हुए हैं और हाल में नलकूप की कोठरी पर तीन तेंदुए बैठे दिखे।
इन घटनाओं के चलते लगभग 20 गांवों में दहशत का माहौल है। जिले में तीन अगस्त से शुरू हुई घटनाओं में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है और 12 लोग तेंदुए के हमलों में घायल हुए हैं।
घटनाओं और पकड़े गए जानवर
अगस्त में दर्ज मौतों के विवरण इस प्रकार हैं।
- 3 अगस्त: लालापुर पीपलसाना में खेत में काम कर रहीं संतोष देवी की मृत्यु
- 18 अगस्त: बहापुर बलिया में खेत में काम कर रहीं विरमो देवी की मृत्यु
- 25 अगस्त: मिथिलेश देवी की मौत
- 29 अगस्त: बहापुर बलिया में घर के पास सो रहे जगराज सैनी को तेंदुए ने उठाकर खेत में ले जाकर मार डाला
वन विभाग ने तीन अगस्त के बाद से तेंदुओं को पकड़ने का अभियान तेज कर दिया है। 26 सितंबर को कांठ के रायपुर-भरतपुर से एक वयस्क तेंदुआ पिंजरे में कैद हुआ। अब तक जिले में कुल 19 तेंदुए पकड़े जा चुके हैं और 49 स्थानों पर पिंजरे लगाए गए हैं।
कांठ और ठाकुरद्वारा के आसपास विशेष निगरानी की जा रही है। पाइंदापुर, रामसराय और पाठंगी तथा छजलैट के सीकरी, शाहपुर अब्दुलबारी और दयानाथपुर जैसे गांवों में सक्रियता देखी गई है। ठाकुरद्वारा में राईभूड़, लालापुर पीपलसाना, बहापुर बलिया और मलपुर सेमली समेत 30 से अधिक गांवों में पिंजरे लगाए गए हैं।
वन विभाग जलभराव के कारण तेंदुए आबादी के निकट आने की बात बता रहा है। मानसून में खेतों की गीली जमीन तेंदुओं को सूखे स्थान खोजने पर मजबूर करती है, जिससे वे गाँव के पास दिखाई दे सकते हैं। विभाग कैमरा ट्रैप और थर्मल ड्रोन से निगरानी बढ़ा रहा है और प्रभावित इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है।
वन विभाग ने लोगों से अनुरोध किया है कि तेंदुआ दिखाई देने पर उसे घेरने की कोशिश न करें बल्कि तुरंत वन विभाग को सूचित करें। आगे भी गश्त और पिंजरा लगाने की कार्रवाई जारी रहेगी ताकि और जान-माल की हानि रोकी जा सके।
स्रोत: अमर उजाला

