मुरादाबाद। कांठ-ठाकुरद्वारा के गांवों में पिछले कुछ दिनों से तेंदुओं की सक्रियता बढ़ी है और शुक्रवार रात समदगढ़ उर्फ सिकंदराबाद के पास तीन तेंदुए एक साथ नलकूप की कोठरी पर बैठते दिखाई दिए। तीनों तेंदुए आसपास के गन्ने के खेतों में चले गए, लेकिन ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों ने कार से तिंदुओं का वीडियो बनाया और वन विभाग को भेजा। यह क्षेत्र आबादी से करीब 500 मीटर दूर है। तीन तेंदुओं के एक साथ दिखने से कांठ के 20 से ज्यादा गांवों में दहशत फैल गई है।
पिंजरे में पकड़े गए तेंदुए
ठाकुरद्वारा के शेरपुर पट्टी में लगाए गए पिंजरे में एक और तेंदुआ पकड़ा गया, जबकि कांठ तहसील के गांव भरतपुर में भी शनिवार तड़के पिंजरे में दूसरा तेंदुआ फंस गया। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और दोनों तेंदुओं को सुरक्षित निकालकर मुरादाबाद के डियर पार्क ले गई।
भरतपुर गांव में 17 सितंबर को पहला मादा तेंदुआ पिंजरे में पकड़ा गया था और उसी स्थान पर दूसरे पिंजरे को 17 सितंबर से ही लगाया गया था। 15 सितंबर को भरतपुर की निवासी निर्वेश देवी पर गन्ने के खेत में तेंदुआ हमला कर चुके था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हुई थीं।
क्षेत्र में भय और नुकसान
क्षेत्र में करीब एक माह से तेंदुए की दहशत के चलते ग्रामीण जंगल में जाने से कतरा रहे थे। तेंदुए के डर के कारण खेती के काम प्रभावित हुए और लोग रात को जागकर अपने पशु और परिवार की सुरक्षा कर रहे थे। पकड़े जाने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और उम्मीद जताई कि अब वे सुरक्षित होकर खेती फिर से शुरू कर सकेंगे।
तेंदुओं के हमले में डेढ़ माह के भीतर तीन महिलाओं सहित चार लोगों की मौत हो चुकी है। तीन अगस्त को लालापुर पीपलसाना में घास काट रही महिला पर तेंदुए ने हमला कर उसे मार डाला था। इसके अलावा बहापुर बलिया, मलकपुर सेमली और राईभूड़ जैसे गांवों में दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं।
वन विभाग और स्थानीय लोग अब सतर्कता बढ़ा रहे हैं। वन कर्मचारियों ने पिंजरे और रेस्क्यू टीमों को सक्रिय रखा है ताकि अधिक तेंदुओं को पकड़कर उनके और लोगों के सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
स्रोत: अमर उजाला

