मुरादाबाद। जिले में लोग कम निवेश में केला प्लांट का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और कच्चे केले से चिप्स बनाकर अच्छी आय कमाई जा सकती है। उद्यान विभाग इस व्यवसाय को बढ़ावा दे रहा है और परियोजना लागत का 35% सब्सिडी के रूप में दे रहा है।
उद्यान विभाग के डीआरपी विमल कुमार तोमर ने कहा, “अगर आप कम निवेश में खाद्य प्रसंस्करण का कारोबार शुरू करने का प्लान बना रहे हैं तो कच्चे केले से चिप्स बनाने का व्यवसाय आपके लिए एक विकल्प हो सकता है।” उन्होंने चिप्स बनाने की साधारण प्रक्रिया भी बताई।
व्यवसाय की लागत और संभावित कमाई
एक छोटी स्तर की इकाई शुरू करने के लिए मशीन, कच्चा माल, पैकिंग, बिजली कनेक्शन व अन्य जरूरी व्यवस्था मिलाकर करीब 5 से 8 लाख रुपये का शुरुआती निवेश माना जा सकता है। ऐसी इकाई प्रतिदिन करीब 200 किलो तैयार चिप्स का उत्पादन करके महीने में करीब 5,000 किलो चिप्स बना सकती है।
पैकेजिंग, स्वाद और बाजार के हिसाब से मुनाफा बदलता रहेगा। उदाहरण के तौर पर यदि सभी खर्च निकालने के बाद प्रति किलो 30 से 50 रुपये शुद्ध मार्जिन बचता है तो 5,000 किलो मासिक उत्पादन पर करीब 1.5 से 2.5 लाख रुपये मासिक लाभ का अनुमान है। यह केवल अनुमान है और वास्तविक लाभ बिक्री व लागत पर निर्भर करेगा।
मशीन व कच्चा माल
बिजनेस में कटिंग मशीन, चिप्स तलने की मशीन, तेल निकालने की व्यवस्था, मसाला मिलाने की मशीन, वजन करने की मशीन और पैकिंग मशीन की जरूरत पड़ सकती है। कच्चा केला स्थानीय किसानों, थोक फल मंडियों या दूसरे कारोबारियों से खरीदा जा सकता है जिससे लागत नियंत्रित रखी जा सकेगी।
व्यवसाय शुरू करने वालों के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत तक ऋण‑संबंधित पूंजीगत सब्सिडी, अधिकतम 10 लाख रुपये प्रति इकाई, का प्रावधान है। लाभार्थी को कम से कम 10 प्रतिशत अपना अंशदान देना होता है और बाकी बैंक ऋण के माध्यम से जुटाया जा सकता है।
आवेदन के लिए सामान्य तौर पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली का बिल, राशन कार्ड, बैंक संबंधी दस्तावेज और मशीनों का कोटेशन जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है। इच्छुक लोग अपने जिले के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से योजना की वर्तमान पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी लेकर आगे बढ़ सकते हैं।
स्रोत: News18

