शामली। छह साल पुराने दुष्कर्म मामले में स्थानीय अदालत ने आज दोषी को सजा सुनाई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक भारतेंदु ने रूपेश को 10 वर्ष के कारावास और 25,000 रुपये अर्थदंड की सजा दी।
जिला शासकीय अधिवक्ता संजय चौहान और विशेष लोक अभियोजक पोक्सो पुष्पेंद्र मलिक ने बताया कि 30 जुलाई 2020 को झिंझाना थाने में किशोरी के पिता ने मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में कहा गया था कि पिंडोरा निवासी रूपेश ने उसकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया था।
तफ्तीश और सुनवाई
शिकायत के बाद स्थानीय पुलिस ने किशोरी को बरामद कर मेडिकल परीक्षण करवा दिया और न्यायालय में उसका बयान दर्ज कराया। बयान के आधार पर जांच में मुकदमे में दुष्कर्म की धारा बढ़ा दी गई और पुलिस ने रूपेश को गिरफ्तार कर चालान न्यायालय में प्रेषित कर दिया।
अभियोजन पक्ष ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान कुल आठ गवाह अदालत में पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलों और पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने दोष सिद्ध पाया। न्यायाधीश अशोक भारतेंदु ने टिप्पणी की कि किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।
मामले की गूंज लखनऊ तक पहुंची थी और परिजनों ने अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी। उच्च स्तर से मामले की जानकारी लेकर स्थानीय पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी थी। क्षेत्र में भी इस प्रकरण की कार्रवाई को लेकर काफी चर्चा रही।
अदालत ने दोषी को दंडित करते हुए 10 साल का कारावास और 25,000 रुपये का अर्थदंड लगाया। मुकदमे की सुनवाई और सजा से जुड़ी कागजी कार्रवाई कोर्ट रेकॉर्ड में दर्ज कर दी गई है।
स्रोत: अमर उजाला

