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शामली: दयाल आश्रम में श्रीराम कथा के दूसरे दिन शिव‑सती प्रसंग ने भावुक किया

कथा आचार्य पंडित संजय शास्त्री ने बाबा मदन लाल महाराज की पुण्यतिथि पर शिव‑सती प्रसंग के माध्यम से आत्मज्ञान और संस्कार का संदेश दिया।

शामली: दयाल आश्रम में श्रीराम कथा के दूसरे दिन शिव‑सती प्रसंग ने भावुक किया
फोटो: अमर उजाला

शामली। दयाल आश्रम में रविवार को श्रीराम कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा हुए। यह कथा बाबा मदन लाल महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित की गई थी।

कथा में शिव‑सती का आध्यात्मिक अर्थ

कथा आचार्य पंडित संजय शास्त्री ने शिव‑सती प्रसंग का वर्णन करते हुए इसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह प्रसंग जीव और ब्रह्म के मिलन, मोह के त्याग तथा चेतना के जागरण का संदेश देता है।

पंडित संजय शास्त्री ने कहा कि शिव विशुद्ध और स्थिर चेतना के प्रतीक हैं जबकि सती उसी चेतना की सक्रिय ऊर्जा यानी शक्ति का स्वरूप है। उन्होंने राजा दक्ष के यज्ञ को भौतिक अहंकार और जीव के संकुचित दृष्टिकोण का प्रतीक बताया।

कथा में बताया गया कि सती द्वारा भगवान श्रीराम की परीक्षा लेना जीव के भीतर उत्पन्न संशय और अज्ञान को दर्शाता है। साथ ही सती का अग्नि से देह त्यागना बाहरी विकारों को छोड़कर शुद्ध चेतना की ओर बढ़ने का संदेश देता है।

कथा का सामाजिक सन्देश

कथा आचार्य ने अहंकार और अज्ञान से ऊपर उठकर ही मनुष्य अपनी मूल दिव्य चेतना प्राप्त कर सकता है, यह बात कही। उन्होंने बच्चों को मर्यादित संस्कार देने और अपनी संस्कृति से परिचित कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कथासभा में संजीव चावला, अशोक चावला, सुभाष नारंग, मदन नारंग, विनोद डैम, पवन डैम और ललित अरोड़ा सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे। उपस्थितों ने कथा का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।

आश्रम में आयोजित कार्यक्रम ने आसपास के लोगों को आध्यात्मिक चिंतन के लिए प्रेरित किया। आगे भी इसी प्रकार के कार्यक्रमों की जानकारी आयोजकों द्वारा दी जाएगी और भक्तों से नियमित रूप से भागीदारी की अपील की जा रही है।

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।