ऊन। ऊन सहकारी गन्ना विकास समिति की वार्षिक साधारण सभा में शेरमऊ चीनी मिल के क्रय केंद्रों को लेकर किसानों में तीखी असहमति देखी गई। शुक्रवार को समिति सभागार में हुई बैठक में दोनों पक्षों के बीच शोर-शराबा भी हुआ।
बैठक में कुल 51 प्रस्ताव पारित किए गए। अधिकांश किसानों ने ऊन की सुपीरियर फूड ग्रेंस प्राइवेट लिमिटेड के क्रय केंद्र लगाए जाने की मांग जताई। दुल्लाखेड़ी के किसानों ने बजाज शुगर मिल थानाभवन का क्रय केंद्र हटाकर ऊन चीनी मिल का क्रय केंद्र लगाने की बात कही।
मुख्य मांगें और फैसले
किसानों ने क्रय केंद्रों के आवंटन के साथ-साथ अन्य कई मांगें भी उठाईं। उन्होंने गन्ना देने के मार्गों की पेराई सत्र से पहले मरम्मत कराने, कीटनाशक दवाओं पर सब्सिडी देने और 14 दिन में गन्ना भुगतान कराने की माँग की। साथ ही पिछले वर्षों के विलंबित भुगतान पर ब्याज देने की भी माँग रखी गई।
उत्तम शुगर मिल शेरमऊ के गत वर्ष नौ क्रय केंद्र लगाए गए थे। इस वर्ष उन क्रय केंद्रों पर गन्ना डालने वाले किसान दो गुटों में बंटे दिखे, जिस कारण बैठक के दौरान हंगामा हुआ। कुछ किसानों ने स्पष्ट रूप से सुपीरियर फूड ग्रेंस प्राइवेट लिमिटेड को गन्ना देने की मांग दुहराई।
उत्तम शुगर मिल शेरमऊ के गन्ना प्रबंधक परविंदर राठी ने बताया कि मिल किसानों को कृषि यंत्र उपलब्ध करा रही है। वहीं, थानाभवन मिल के गन्ना प्रबंधक मनोज तोमर ने अपने क्रय केंद्रों को यथावत रखने की मांग की।
बैठक का संचालन समिति के सचिव अजीत कुमार सिंह ने किया। इस दौरान समिति के डायरेक्टर मैनपाल, सतीश कटारा, अनिल कुमार, कमलेश देवी, वीरमति, अफलातून, धर्मपाल, देवेंद्र सिंह, सतेंद्र सिंह, विनोद कुमार, इंद्रपाल सिंह पांचाल, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक धीरेंद्र नाथ पांडे और प्रभारी सचिव मारकंडे मौर्य मौजूद रहे।
अब आगे क्या होगा
किसानों के पास किए गए प्रस्तावों और मांगे गए उपायों को लागू करने के लिए संबंधित मिलों तथा समिति के अधिकारियों से आगे समन्वय की उम्मीद की जा रही है। स्थानीय किसानों का कहना है कि पेराई सत्र शुरू होने से पहले मार्गों की मरम्मत और समय पर भुगतान ही समस्याओं का स्थायी हल होगा।
स्रोत: अमर उजाला

