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सुल्तानपुर: 45.5% महिलाओं को ही प्रसव पूर्व स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ

एनएफएचएस-6 में जिले में 25.2% महिलाओं की पहली तिमाही में जांच नहीं हुई और केवल 28.4% को आयरन-फोलिक मिली।

सुल्तानपुर: 45.5% महिलाओं को ही प्रसव पूर्व स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ
फोटो: अमर उजाला

सुल्तानपुर। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि जिले में गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली प्रसव पूर्व स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा अंतर है। सर्वेक्षण के मुताबिक सिर्फ 45.5% महिलाओं को प्रसव पूर्व सेवाओं का लाभ मिल रहा है और बाकी 55.5% इससे बाहर हैं।

आंकड़ों में सबसे चिंताजनक बात पहली तिमाही की कमी दिखती है। सर्वेक्षण में तय हुआ है कि 25.2% महिलाओं की पहली तिमाही में जरूरी जांचें नहीं हो पातीं। शुरुआती हफ्तों में ही रक्त की कमी, उच्च रक्तचाप या संक्रमण का पता चलकर इलाज शुरू हो सकता है, लेकिन कई महिलाएं यह जांच करवा नहीं पा रही हैं।

मुख्य आंकड़े

एनएफएचएस-6 के आंकड़े सेवाओं के पहुँच और गुणवत्ता में फासले दिखाते हैं। कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • 45.5% महिलाएं प्रसव पूर्व स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रही हैं।
  • 55.5% महिलाएं इन सेवाओं से बाहर हैं।
  • 25.2% महिलाओं की पहली तिमाही में जरूरी जांचें नहीं हुईं।
  • 28.4% महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान आयरन-फोलिक एसिड की खुराक मिली।
  • 13.4% महिलाएं 180 दिन या उससे अधिक समय तक आयरन की खुराक ले पाईं।

सरकारी तंत्र में गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, नियमित जांच, हीमोग्लोबिन परीक्षण और वजन निगरानी का प्रावधान है। आशा कार्यकर्ता भी गांव-गांव जाकर महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने का काम करते हैं। इसके बावजूद सर्वेक्षण ने व्यवस्था और वास्तविक पहुंच के बीच बड़ा अंतर उजागर किया है।

डॉ. भारत भूषण, मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कहना है, “काफी महिलाएं इसका लाभ ले रही हैं। अन्य महिलाओं तक भी सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आयरन की कमी होने पर दवा भी उपलब्ध कराई जा रही है।”

स्थानीय स्तर पर पहली तिमाही में जांच न होने का असर माताओं और नवजातों दोनों पर पड़ सकता है। लोग कहते हैं कि कई बार स्वास्थ्य केन्द्रों तक पहुँच, जानकारी की कमी और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण समय पर जांच नहीं हो पाती।

आगामी दिनों में स्वास्थ्य विभाग को पंजीकरण से लेकर लंबी अवधि की दवा आपूर्ति और आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर जोर देना होगा। जिन्हें अभी सेवाएं नहीं मिल रही, वे नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्रों में पंजीकरण कराने और निर्धारित जांच कराने के लिए संपर्क कर सकते हैं।

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

Alok Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।