लखनऊ। यूपी में राज्यसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद और राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने विपक्षी एकता के आह्वान का पलटवार किया।
संजय निषाद ने विपक्षी कार्रवाइयों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास “केवल बयानबाजी, पोस्टरबाजी और एसी-पीसी के अलावा कोई शक्ति नहीं है”। उन्होंने यह भी कहा कि “विपक्ष को लोग 70 साल तक देख चुके हैं” और विभिन्न दलों के नेताओं ने यह सब देखने के बाद अपने दल खड़े किए या एनडीए के साथ आए।
मंत्रियों का आरोप और दानिश का दावा
दानिश आजाद अंसारी ने सपा के दावों को खारिज करते हुए कहा कि “समाजिक पार्टी ने झूठ का जो गुब्बारा फुलाया था, अब उस गुब्बारे की हवा निकल चुकी है”। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से सपा ने “गफलत और नफरत की राजनीति” फैलाई, उसके लिए राज्य की जनता कभी माफ नहीं करेगी।
दानिश ने आगे दावा किया कि “2027 के विधानसभा चुनाव की तरफ सपा जिस तरीके से आगे बढ़ रही है, उसकी अब तक की सबसे बड़ी हार होने वाली है” और उनकी भविष्यवाणी थी कि “2027 में समाजवादी पार्टी दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी”।
राज्यसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच ये टिप्पणियां राजनीतिक उठान‑पतन को और बढ़ा सकती हैं। विपक्ष के एकजुट होने के आह्वान पर इन संगठित पलटवारों से सियासी महौल गर्म है और दोनों ओर से रैलियां व बयानबाजी की संभावना बढ़ गई है।
स्थानीय नेता और मतदाता अब अगले महीनों में होने वाली बैठकों और गठबंधन की रणनीतियों पर नजर रखेंगे। आगे क्या होगा यह चुनावी दलों की अगली नीतियों और आपसी समीकरण पर निर्भर करेगा।
स्रोत: ABP न्यूज़

