लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया बयानों पर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और डॉ. संजय निषाद ने तेज पलटवार किया है। दोनों नेताओं ने रोजगार, भर्ती, कानून-व्यवस्था, मोबाइल व शिक्षा समेत कई मुद्दों पर सपा के कार्यकाल की तुलना योगी सरकार से करते हुए निशाना साधा।
ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि पिछले विधानसभा चुनाव में सुभासपा के सिंबल का इस्तेमाल करके अखिलेश ने अपने 12 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था और उस तरह के गठबंधन से वोट नहीं मिलते। उन्होंने उन नेताओं को “दगे हुए कारतूस” कहते हुए कहा कि ये नेता बार-बार पार्टियां बदलते हैं और भरोसेमंद नहीं हैं।
रोजगार, भर्ती और निवेश पर तकरार
राजभर ने सरकारी भर्ती और नौकरियों पर सपा पर कठोर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सपा राज में नौकरियां बिकती थीं और यूपीपीएससी में पक्षपात हुआ करता था, जबकि आज “बिना किसी भ्रष्टाचार और पक्षपात के पारदर्शी प्रक्रिया” के तहत 10 लाख योग्य युवाओं को नौकरियां मिली हैं। राजभर ने जिलों, ब्लॉकों और तहसीलों में रोजगार मेले और बैंकों के माध्यम से ब्याज-रहित ऋण देकर स्वरोजगार जोड़ने का भी जिक्र किया।
निवेश के मामले में राजभर ने कहा कि सपा के समय कोई निवेशक उत्तर प्रदेश में आने को तैयार नहीं था, जबकि योगी सरकार में सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियां प्रदेश में आकर कारोबार स्थापित कर रही हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है।
कानून-व्यवस्था पर राजभर ने कहा कि सपा के पांच साल में प्रदेश में एक हजार से अधिक दंगे हुए थे, जबकि योगी आदित्यनाथ के दस साल के शासन में एक भी दंगा नहीं हुआ। उनके मुताबिक गुंडा-माफिया पहले खुलेआम घूमते थे लेकिन अब उनकी सक्रियता समाप्त हो गई है।
अयोध्या के संभावित दौरे पर डॉ. संजय निषाद ने भी टिप्पणी की और कहा कि देर से ही सही, कम से कम वे अयोध्या आ तो रहे हैं। निषाद ने कहा कि अखिलेश को भगवान श्रीराम के साथ-साथ निषादराज के भी दर्शन करने चाहिए और अपनी पिछली गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, “माफी मांगने से गलती सुधर जाती है.”
राज्यसभा चुनाव और अन्य मसलों को देखते हुए दोनों पक्षों की बयानबाजी तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। आगे सपा और भाजपा के बीच यह राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना है और प्रदेश की राजनीति में इन नारों का असर दिखाई देगा।
स्रोत: ABP न्यूज़

