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आगरा: अदालत ने जेठ धीरेंद्र का नाम कराया आरोपियों में, 14 अक्तूबर को हाजिरी का आदेश

अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई और पुलिस आयुक्त को मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

आगरा: अदालत ने जेठ धीरेंद्र का नाम कराया आरोपियों में, 14 अक्तूबर को हाजिरी का आदेश
फोटो: अमर उजाला

आगरा। अदालत ने एक महिला की शिकायत पर पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सख्त नाराज़गी जताते हुए मामले में जेठ धीरेंद्र का नाम आरोपियों में वापस डाला है और 14 अक्तूबर को पेश होने का समन जारी किया है। यह मामला थाना एत्माद्दौला में 2023 में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है।

पीड़िता ने अपने ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट, हत्या के प्रयास और अश्लील हरकत के आरोप लगाए थे। शुरुआती जांच के दौरान तत्कालीन विवेचक ने विवेचना से हत्या के प्रयास और अश्लील हरकत की धाराएं हटा दीं और जेठ धीरेंद्र सहित कुछ नाम निकाल दिए। बाद में पति, सास और ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट व डीपी एक्ट के आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया।

अदालत ने दो बार दिए थे आदेश

पीड़िता की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से विवेचना पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। अदालत ने पहले 17 अगस्त 2024 को अग्रिम विवेचना के आदेश दिए थे। बावजूद इसके विवेचक ने पुराने आरोपपत्र को ही सही मानते हुए वही रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी। पीड़िता ने फिर से प्रार्थनापत्र दिया और अदालत ने 5 मार्च, 2025 को दोबारा अग्रिम विवेचना के आदेश दिए थे।

इन दोनों आदेशों के बाद भी पुलिस ने आरोपपत्र में कोई संशोधन नहीं किया और पुरानी रिपोर्ट ही अदालत में पेश की। इस पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-8 कन्हैया ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और सख्त रुख अपनाया। अदालत ने पूर्व आरोपपत्र में जिन लोगों के नाम थे, उनमें हरेंद्र पाल सिंह, महिपाल सिंह और गुड्डी देवी के साथ जेठ धीरेंद्र के खिलाफ भी खुद संज्ञान लिया।

आदालत ने जेठ धीरेंद्र के समन जारी करने के साथ-साथ पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस आयुक्त को निर्देश देने का भी आदेश दिया है। हत्या के प्रयास के आरोप के संबंध में अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण उस धारा में संज्ञान नहीं लिया।

स्थानीय लोगों और पीड़िता के लिए अब अगला कदम अदालत के समन के अनुसार 14 अक्तूबर को पेश होना होगा। पुलिस आयुक्त को दिए निर्देश के बाद विभागीय जांच और कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। प्रभावित पक्ष मामले की निगरानी कर सकता है और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिवक्ता से संपर्क बनाए रखे।

स्रोत: अमर उजाला

Alok Kumar

Alok Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।