आगरा। जिले के मुख्य अस्पताल परिसर में बंदरों के असामान्य व्यवहार ने मरीजों और तीमारदारों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। बृहस्पतिवार को बंदरों ने एक युवती पर अचानक हमला किया और उसका मोबाइल छीनकर नीचे पटक दिया, जिससे मोबाइल पूरी तरह टूट गया।
अस्पताल के गलियारों में लोग डर-डर कर चल रहे हैं। कई लोग चुपचाप सड़क किनारे या बिल्डिंग के सटे रास्तों से निकलते हैं ताकि बंदरों का सामना न हो। बंदरों के कारण कई बार सामान्य इलाज कराने पहुँचे लोग भी असहज महसूस करने लगे हैं।
स्थानीयों के अनुभव
तीमारदारों का दर्द बताते हुए नामनेर निवासी उमा ने कहा कि वह बृहस्पतिवार को अपनी जांच कराने अस्पताल आई थी और वहीं देखा कि बंदरों ने एक युवती पर हमला कर उसका मोबाइल छीन लिया। वहीँ मालपुरा निवासी बबलू साल ने बताया कि वह 2008 से जिला अस्पताल आ रहा हूं और तब से हालात जस के तस हैं। बबलू साल ने कहा कि जब सामान्य लोग ही यहां सुरक्षित नहीं हैं, तो दिव्यांगों की हालत और खराब है।
मलपुरा निवासी धर्मवीर ने कहा कि वह पहली बार अपनी पत्नी का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे और बंदरों को सरेआम घूमते देख लोग कहते हैं कि चुपचाप निकल जाओ, वरना समस्या हो सकती है। कई लोग डरते हैं कि अगर बंदर काट लें तो उसकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा।
अस्पताल परिसर में बैठने, खड़े होने और फी घटनास्थल तक जाने वाले रास्तों पर लोग सतर्क रहते हैं। कई तीमारदारों ने कहा कि वे अपने साथियों को पहले से आगाह करके ही अस्पताल के अंदर जाते हैं। छोटे बच्चे और बुज़ुर्ग परिवार बंदरों की गतिविधि से सबसे ज्यादा परेशान दिखे।
स्थानीय लोग प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से मांग कर रहे हैं कि बंदरों की समस्या को स्थायी रूप से सुलझाया जाए। कई लोग चाहते हैं कि परिसर में निगरानी बढ़ायी जाए और बंदरों को हटाने के लिए संबंधित विभाग को बुलाया जाए।
आगे क्या होगा, यह प्रशासन तय करेगा; फिलहाल मरीज और तीमारदार सुरक्षित मार्ग तलाश कर अस्पताल से बाहर निकल रहे हैं और कोई राहत न मिलने पर कार्रवाई की उम्मीद जता रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला

