आगरा। सरकारी जमीन पर बिल्डर को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने के मामले में प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इस प्रकरण की जांच के लिए संयुक्त जांच कमेटी गठित कर दी है।
जांच अधिकारी के रूप में एडीएम प्रोटोकॉल अमरेंद्र कुमार वर्मा और एडीए के सचिव संजय कुमार को नामित किया गया है। टीम को प्रकरण की हर कड़ी की विस्तार से जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच टीम ने संबंधित पूरे प्रकरण से जुड़ी मूल फाइल तलब कर ली है।
आरटीआई और दस्तावेजीय मिलान
सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी और कलेक्ट्रेट तथा प्राधिकरण के पत्राचार के मिलान से गड़बड़ी का पता चला। जांच में यह सामने आया कि पत्रावली से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य गायब कर दिए गए थे।
जिन दस्तावेजों के आधार पर एनओसी जारी की गई, उनमें हेरफेर और छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। प्रशासन अब उपलब्ध कराई गई पत्रावली और प्राधिकरण से प्राप्त एनओसी संबंधित हर दस्तावेज का बारीकी से मिलान कर रहा है।
सूत्रों ने बताया है कि जब राजस्व और सरकारी रिकॉर्ड में संबंधित भूमि स्पष्ट रूप से राजकीय स्थान के रूप में दर्ज थी, तब भी किस आधार पर और किन नियमों को ताक पर रखकर एनओसी बिल्डर के पक्ष में जारी कर दी गई, यह जांच का मुख्य मामला है। जांच टीम इस बात की जानकारी जुटा रही है कि एनओसी जारी कराने में किस तरह की प्रक्रियात्मक चूक या अनियमितता हुई।
एडीए सचिव संजय कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच पूरी कर रिपोर्ट दो दिन में जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तेज़ी से सभी दस्तावेज जुटाने और मिलान की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों और संपत्तिधारकों के लिए यह मामला संवेदनशील है क्योंकि विवादित जमीन पर कई धारणाएँ और योजनाएँ जुड़ी हुई हैं। आगे की कार्रवाई और रिपोर्ट आने पर प्रशासन आगे के कदम तय करेगा।
स्रोत: अमर उजाला

