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बलिया: 50 हजार के इनामी राजकुमार वर्मा की यूपी-बिहार कड़ियों की जांच तेज

एसटीएफ ने उसे असम के गुवाहाटी से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर यूपी लाया; ठिकानों, हथियार और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

बलिया: 50 हजार के इनामी राजकुमार वर्मा की यूपी-बिहार कड़ियों की जांच तेज
फोटो: अमर उजाला

बलिया। सहतवार थाना क्षेत्र में वर्ष 2012 में पूर्व प्रधान की पत्नी फूलमती की हत्या के मामले में 13 साल से फरार चल रहे 50 हजार रुपये के इनामी राजकुमार वर्मा उर्फ प्रदीप वर्मा की असम से गिरफ्तारी के बाद जांच तेज कर दी गई है। एसटीएफ वाराणसी की टीम ने उसे असम के गुवाहाटी स्थित वशिष्ठ थाना क्षेत्र के बकरापाड़ा रोड से गिरफ्तार किया।

ट्रांजिट रिमांड पर यूपी लाने के बाद उससे पूछताछ हो रही है। पूछताछ में फरारी के दौरान के ठिकानों, संपर्कों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। एसटीएफ यह भी देख रही है कि उसके कब्जे या संपर्कों से जुड़े हथियार, माओवादी साहित्य और अन्य सामग्री कहां से आई और किसके पास रही।

पुराने नेटवर्क की कड़ियों पर नजर

एसटीएफ के अनुसार सहरसपाली निवासी राजकुमार का आपराधिक सफर वर्ष 2007-08 के विवादों के बाद माओवादी गतिविधियों से जुड़ा। वर्ष 2008 में सोहन सिंह की हत्या के बाद उसका संपर्क प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) से जुड़े सीताराम उर्फ धनु से हुआ।

वह संगठन की गतिविधियों में सक्रिय रहा और 2012 में अतडरिया गांव के तत्कालीन प्रधान मुसाफिर चौहान को पुलिस का मुखबिर मानकर अपने साथियों के साथ पुलिस की वर्दी में उनके घर पहुंचा था। प्रधान के नहीं मिलने पर उनकी पत्नी फूलमती की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में कई आरोपित गिरफ्तार हुए, लेकिन राजकुमार फरार रहा।

सीताराम उर्फ धनु की गिरफ्तारी भी इसी नेटवर्क से जुड़ती है। सीताराम को दिसंबर 2025 में एटीएस ने काशी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था और वह भी 50 हजार रुपये का इनामी था। इसके अलावा 15-16 अगस्त 2023 को बलिया में हथियारों के साथ गोपनीय बैठक के मामले में पांच संदिग्ध नक्सलियों तारा देवी, लल्लू राम, सत्य प्रकाश, राममूरत और विनोद साहनी को एटीएस ने गिरफ्तार किया था।

2023 के माओवादी बैठक प्रकरण की विवेचना एनआईए कर रही है। एसटीएफ का कहना है कि राजकुमार से मिली जानकारी पुराने मामलों की जांच में अहम साबित हो सकती है और एनआईए को भी उपयोगी सुराग मिल सकते हैं।

जांच टीम अब बिहार के मुजफ्फरपुर, बांका और सीतामढ़ी तक फैले संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह देखा जा रहा है कि फरारी के दौरान राजकुमार ने किन लोगों की मदद ली, कहां ठहरता रहा और क्या उसने नाम-व पहचान बदलकर नेटवर्क से संपर्क बनाए रखा।

स्थानीय लोगों को फिलहाल प्रशासन और पुलिस से सहयोग करना चाहिए और यदि किसी को संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी हो तो नजदीकी थाना या एसटीएफ को सूचित करें। आगे की तफ्तीश में और गिरफ्तारियां या नई जानकारी सामने आ सकती है।

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

Alok Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।