बलिया। चारा खिलाते समय पालतू गाय के पटके से घायल हुए बलिया के युवक का इलाज शनिवार को एम्स‑बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में किया गया। नेत्र रोग और ओरल मैक्सिलोफेशियल विभाग की टीम ने सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक तीन घंटे लंबी जटिल सर्जरी की।
सर्जरी में आधुनिक इमेज‑गाइडेड नेविगेशन सिस्टम की सहायता ली गई। ऑपरेशन में 10 टाइटेनियम मिनी प्लेट और 1 टाइटेनियम मेश का उपयोग किया गया। कुल मिलाकर चेहरे पर 80 टांके लगाए गए।
चोटों की जटिलता और खोजी जांच
मरीज की रेडियोलॉजिकल जांच में ऑर्बिटल फ्लोर का कमिन्यूटेड फ्रैक्चर पाया गया। साथ ही पेरिऑर्बिटल फैट मैक्सिलरी साइनस में हर्नियेट कर गया था। मैंडिबल के सिम्फाइसिस एवं कॉन्डाइलर क्षेत्रों में भी फ्रैक्चर थे।
घटना से आंख अंदर की ओर धंस गई थी और मुँह खुलने में भी दिक्कत हो रही थी। चोट की इस जटिलता के कारण बहुविषयक पुनर्निर्माण की जरूरत थी, इसलिए ऑपरेशन में नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया और ऑर्बिटल फ्लोर का पुनर्निर्माण टाइटेनियम मेश से किया गया। मैंडिबुलर फ्रैक्चर को टाइटेनियम मिनीप्लेट्स से फिक्स किया गया।
आईएमएस‑बीएचयू के प्रो. आरपी मौर्य ने बताया, “मरीज की दृष्टि सुरक्षित रहेगी और वह सामान्य रूप से भोजन भी कर सकेगा।” कुलपति और आईएमएस निदेशक के सहयोग से विभाग को आधुनिक ऑर्बिटल नेविगेशन मशीन उपलब्ध कराई गई है, जिसने सर्जरी में मदद की।
सर्जरी के दौरान चेहरे की हड्डियों का स्थिर और शरीर की संरचना के अनुरूप पुनर्निर्माण संभव हुआ। ऑपरेशन के बाद मरीज की निगरानी और आगे की बहुविषयक देखभाल जारी रहेगी।
यह मामला मेडिकल टीम के समन्वित प्रयास और तकनीकी मदद का उदाहरण रहा, जिससे जटिल चेहरे की चोटों का उपचार संभव हुआ।
स्रोत: अमर उजाला

