बांदा। पन्ना टाइगर रिजर्व को फिर से बाघों से आबाद कराने वाले संस्थापक बाघों की स्मृति में उनकी प्रतिमाएं लगवाने की मांग उठी है। यह बात वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के दौरान रखी गई।
वन्यजीव प्रेमी अरुण सिंह ने कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला गेट पर हाल ही में हथिनी वत्सला की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि उसी तरह संस्थापक बाघों की प्रतिमाएं भी लगवाई जाएं।
पन्ना का इतिहास और पुनर्स्थापना
अरुण सिंह ने बताया कि वर्ष 2009 में पन्ना बाघ विहीन हो गया था। इसके बाद बाघ पुनर्स्थापना योजना के तहत कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच टाइगर रिजर्व से नर-मादा बाघ लाकर पन्ना में छोड़े गए थे।
उन्होंने विशेष रूप से कहा, “टी-1 से टी-7 तक के संस्थापक बाघों ने पन्ना के जंगल को दोबारा आबाद करने में अहम भूमिका निभाई।” यह ही कारण है कि उनकी स्मृति में प्रतिमाएं लगाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
स्थानीय लोग और वन्यजीव प्रेमी चाहते हैं कि प्रतिमाएं स्थापित होने से पन्ना के पुनरुत्थान और संरक्षण की कहानी को आगे भी याद रखा जा सके। कई लोग मानते हैं कि इससे पर्यटन और क्षेत्रीय जागरूकता भी बढ़ेगी।
अब क्या होगा
अब इस मांग को लेकर स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और वन विभाग से चर्चा का रास्ता अपनाया जाएगा। लोगों ने उम्मीद जताई है कि प्रतिमाओं के लिए स्थान और अनुमति देने संबंधी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

