बांदा। ब्लॉक जसपुरा के रामपुर गांव निवासी संत प्रेमानंद महाराज का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। यह जानकारी 4 अक्टूबर 2026 को सामने आई और खबर फैलते ही क्षेत्र में शोक छा गया।
महाराज लंबे समय से गांव के ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा-पाठ और धार्मिक साधना करते थे। उनके ब्रह्मलीन होने की बात से आसपास के गांवों में मातम पसर गया और साधु-संत, शिष्यों व अनुयायियों की भीड़ मंदिर परिसर में जमा हो गई।
महाराज ने जीवन में साधु दशा बनाए रखी और लोगों को सत्य व सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते थे। खबर में बताया गया है कि उन्होंने चारों धाम की पैदल यात्रा भी की थी और उनका आचरण लोगों के बीच सादगी के लिए जाना जाता था।
ओंकारेश्वर मंदिर में अंतिम दर्शन
ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीण, साधु-संत और शिष्य पहुंचे। मौजूद लोगों ने महाराज के अंतिम दर्शन किए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कानपुर, हरियाणा और पंजाब सहित कई राज्यों से उनके शिष्य व अनुयायी आए थे।
अंतिम विदाई में विनय तिवारी, अरुण कुमार सिंह, नारायण सिंह, कई साधु-संत और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। लोगों ने सादगीपूर्ण ढंग से महाराज को श्रद्धांजलि दी और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
आगे की कार्रवाई
मंदिर परिसर में शोक व्यक्त करने वालों का जमावड़ा जारी है और स्थानीय व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव के लोग जुटे हुए हैं। जो लोग महाराज को नजदीक से जानना चाहते हैं वे ओंकारेश्वर मंदिर जाकर अंतिम दर्शन कर सकते हैं।
स्रोत: अमर उजाला

