बांदा। वायरल बुखार और जुकाम के बीच कान के पर्दे चिपकने की शिकायत लेकर इन दिनों मरीज जिला अस्पताल की ईएनटी ओपीडी में पहुंच रहे हैं। मरीजों को सुनने में दिक्कत, कान सुन्न होने और सीटी जैसी आवाजें सुनाई देने की समस्या हो रही है।
डॉक्टरों ने बताया कि वायरल बुखार और जुकाम के दौरान नाक, गला और कान को जोड़ने वाली यूस्टेशियन ट्यूब में सूजन आ जाती है या वह ब्लॉक हो जाती है। इसके कारण पर्दे के पीछे दबाव बनता है या वहां पानी (फ्लूइड) जमा हो जाता है और सुनने में दिक्कत व पर्दे के चिपकने जैसी समस्या होती है।
ओपीडी का प्रभाह और मरीजों की संख्या
ईएनटी सर्जन डॉ. महेश गुप्ता ने बताया कि उनकी ओपीडी में इन दिनों कान में फंगस और वायरल बुखार के चलते कान के पर्दे चिपकने के मरीज आ रहे हैं। प्रतिदिन उनकी ओपीडी 200 मरीजों की हो रही है। सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक मरीजों के आने का क्रम नहीं टूटता।
उधर, बारिश के बाद कान में फंगस (फंगल इन्फेक्शन) के केस भी बढ़े हैं, जिससे मरीजों को खुजली, बदबू व सुनने में दिक्कत की शिकायत होती है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रभावित मरीजों का समय पर इलाज जरूरी है ताकि संक्रमण बढ़ने से बचा जा सके।
डॉक्टरों की सलाह
डॉक्टर मरीजों के इलाज के साथ भाप लेने की भी सलाह दे रहे हैं ताकि नाक और यूस्टेशियन ट्यूब की सूजन कम हो सके। साथ ही लोगों से कहा जा रहा है कि वे अपने कानों का विशेष ध्यान रखें और कुछ बातों का पालन करें।
- कान को सूखा रखें और नहाते समय कान में पानी न जाने दें।
- खुजाने से बचें; कान में तिनका, पिन, माचिस की तीली या कॉटन बड बिल्कुल न डालें।
- घरेलू तेल से बचें; डॉक्टर की सलाह के बिना कान में कोई ड्रॉप या तेल न डालें।
- ईएनटी सर्जन की देखरेख में ही इलाज कराएं।
शहरवासियों को सलाह दी जा रही है कि यदि सुनने में अचानक कमी या दर्द, तेज खुजली या बदबू जैसा कुछ महसूस हो तो देर न करें और नज़दीकी ईएनटी विभाग में संपर्क कर जांच कराएँ।
स्रोत: अमर उजाला

