बिजनौर। जिले में लगातार बारिश का असर बढ़ गया है। पिछले 48 घंटे से हुई वर्षा के बाद कई इलाकों में मकान गिरने और नदियों के उफान की खबरें सामने आई हैं।
अधिकारियों ने बताया कि तीन दिन में जिले भर में कुल 226.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। सोमवार को अकेले 66 मिमी बारिश हुई। अब तक जिले में 11 मकान बारिश से ढह चुके हैं जिनमें सोमवार को चार मकानों की छत गिरना भी शामिल है।
नदी-नाले और जलस्तर
जलीलपुर क्षेत्र में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है। सुबह गंगा बैराज पर जलस्तर 219 मीटर दर्ज किया गया था, शाम को 218.70 मीटर पर रिकॉर्ड हुआ। बैराज से एक लाख 26 हजार 315 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। रामगंगा बांध का जलस्तर सोमवार शाम 4 बजे 359.850 मीटर पर था।
खो नदी में भी जलस्तर तेज़ी से बढ़ा। धामपुर के इब्राहिमपुर नारायण के पास बने स्टड ध्वस्त हो गए हैं। बाकरपुर गढ़ी से हमीदपुर तक बने तटबंध के नीचे मालन नदी और बारिश का पानी भरा होने से ग्रामीण मुश्किल में हैं। कई खेत जलमग्न हैं और जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने की मामला ग्रामीणों ने उठाया है।
बारिश की वजह से कालागढ़ और आसपास के क्षेत्रों में धान की फसल गिर गई है। जगह-जगह पानी भरने से यातायात बाधित हुआ और किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है। कार्बेट टाइगर रिजर्व में 26 व 27 सितंबर को सुरक्षा कारणों से पर्यटन बंद रहा, सोमवार की सुबह से पर्यटन बहाल हुआ।
मकान गिरने वाले इलाकों में गजरौला शिव, रेहड़, नजीबाबाद और धामपुर शामिल हैं। मंडावली सैदू के मौजा शादीपुर डल्ला निवासी जरीना (56) का कच्चा मकान भरभरा कर गिर गया और घर का सामान मलबे में दब गया। लेखपाल पुनीत सागर ने बताया कि गिरे मकानों की जांच कर मुआवजा दिलाया जाएगा।
आगे क्या होगा
नगीना कृषि वेधशाला के प्रेक्षक सतीश कुमार ने कहा कि मौसम में उतार-चढ़ाव अभी जारी रहेगा। ग्रामीण प्रशासन और सिंचाई विभाग से मांग कर रहे हैं कि तटबंध के नीचे पाइपलाइन डालकर जलनिकासी की व्यवस्था की जाए और प्रभावित किसानों का सर्वे कर मुआवजा दिया जाए।
स्रोत: अमर उजाला

