बिजनौर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को विरासत में मिलने वाली जमीन को लेकर तहसील प्रशासन और स्थानीय लोग विवाद में फँस गए हैं। नजीबाबाद के गांव अमीखानपुर उर्फ जट्टीवाला में करीब 90 बीघा जमीन पर विरासत दर्ज कराने का मामला सामने आया है।
घरेलू दस्तावेजों के मुताबिक गाटा संख्या 349, 375, 377 और 429 की खतौनी में महेंद्र नाथ निवासी कोलकाता का नाम अंकित है। सात सितंबर 2004 को दिल्ली में महेंद्र नाथ की मौत हुई थी। 18 मई को पूर्व सीएम कमलनाथ ने चारों गाटा में जमीन को अपनी और बहनों नीता पुरी व रीता जोशी की विरासत दर्शाने के लिए आवेदन दिया था।
विरासत दर्ज कराने में अड़चन
लिखित आवेदन पर लेखपाल ने मृतक के बाहरी और वारिसों के दूर रहने का उल्लेख करते हुए आगे कार्रवाई की और साथ में एक विवादित शब्द भी लिख दिया। यह आवेदन तहसीलदार की कोर्ट तक पहुँचा, पर मई से अब तक विरासत कमलनाथ और बहनों के नाम नहीं हो सकी है।
जांच में यह भी पता चला कि तहसीलदार नजीबाबाद की कोर्ट में उक्त जमीन को लेकर धर्मपाल बनाम ग्राम सभा नामक मुकदमा चल रहा है। मुकदमे में एक फर्जी वसीयत दाखिल बताई जा रही है, जो पंजीकृत भी नहीं है। साथ ही महेंद्र नाथ का मृत्यु प्रमाणपत्र भी दाखिल हुआ है, जिसकी तारीख 10 अप्रैल 2003 नजीबाबाद में जारी बताई गई है, जबकि वास्तविक मृत्यु सात सितंबर 2004 को दिल्ली में हुई थी।
पुलिस ने आरोपियों पर आरोप लगाया है कि वे साजिश कर जमीन अपनी नाम कराने और बेचने की कोशिश कर रहे थे। मामले में धर्मपाल सिंह और विजय शंकर पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अन्य दो आरोपियों, जसबिंदर सिंह ढिल्लो और हल्का लेखपाल डेविड कुमार, की तलाश जारी है।
सुपौल जांच के लिए रिकॉर्ड तलब किया गया है और तहसील स्तर पर आवश्यक कार्रवाई चल रही है। “जमीन के संबंध में दो आरोपियों को जेल भेजा चुका है। बाकी आरोपियों की तलाश चल रही है। विस्तृत जांच के लिए रिकॉर्ड को तलब किया गया है।” – सुनील कुमार सिंह, सीओ नजीबाबाद
स्थानीय लोगों और आवेदनकर्ता पक्ष दोनों के लिए यह मामला संवेदनशील है। जो लोग इस जमीन से जुड़ा दस्तावेज़ या जानकारी जानते हैं, उन्हें पुलिस और तहसील को सूचित करने की सलाह दी जा रही है। जांच के आगे के कदमों की जानकारी स्थानीय प्रशासन समय‑समय पर देगा।
स्रोत: अमर उजाला

