गोंडा। लंबित मांगों को लेकर नाराज लेखपालों ने शनिवार को सदर और करनैलगंज तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार कर धरना-प्रदर्शन किया। धरने के कारण सेवाएं ठप रहीं और किसानों को आवश्यक काम न मिल पाने पर लौटना पड़ा।
सदर तहसील परिसर में लेखपाल सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक धरने पर बैठे रहे। धरने के बाद उन्होंने एसडीएम सदर जितेंद्र गौतम को ज्ञापन सौंपा। तहसील मंत्री आत्माराम वर्मा ने बताया कि प्रदेशस्तर पर आंदोलन शुरू हो गया है और अगले चरण में 10 अक्तूबर को जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया जाएगा।
करनैलगंज तहसील के सभागार में भी लेखपालों ने धरना देकर मुख्यमंत्री को संबोधित आठ सूत्री ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। तहसील अध्यक्ष मनीष शुक्ल ने कहा कि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 17 अक्तूबर से प्रदेशभर में चरणबद्ध तरीके से संपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा। मनकापुर व तरबगंज में भी लेखपालों ने काम बंद रखा।
लेखपालों की मांगें
लेखपालों ने प्रारंभिक वेतनमान में 2800 ग्रेड पे सहित वेतन विसंगति दूर करने, लंबित अंतर मंडलीय स्थानांतरण और पदोन्नति प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की है। उन्होंने भत्तों में 16 वर्षों से वृद्धि न होने, पटल सहायक व प्रभारी राजस्व निरीक्षक के कार्यों से अवमुक्त करने और लेखपाल पद को तकनीकी घोषित करने का भी अनुरोध किया है।
नागरिकों पर इसका असर तत्काल दिखा। निगवा बोध से खसरा लेने पहुंचे किसान जियालाल ने कहा कि लेखपालों के बहिष्कार के कारण उन्हें खसरा नहीं मिल सका। रुपईडीह के राजेश कुमार ने बताया कि करीब दो वर्ष से वरासत का काम लंबित है और शनिवार को लेखपाल से मिलने आए थे, पर काम नहीं हुआ।
खरहटिया निवासी राम सहज ने कहा कि बाढ़ में धान की फसल बर्बाद हो गई और राहत व मुआवजे के लिए लेखपाल से मिलने आए थे, लेकिन कामकाज ठप होने से लौटना पड़ा। धरने में सदर तहसील के अध्यक्ष जयप्रकाश वर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरपाल, ओमप्रकाश वर्मा, प्रशांत विक्रम सिंह, जितेंद्र कुमार पाल और विकास सिंह सहित कई लेखपाल मौजूद रहे।
आगे क्या होगा
लेखपालों ने स्पष्ट किया है कि 10 अक्तूबर को जिलाधिकारी को ज्ञापन देने के बाद भी अगर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे 17 अक्तूबर से चरणबद्ध बहिष्कार शुरू करेंगे। affected लोगों को सलाह है कि जरूरी राजस्व कार्यों के लिए तहसील से पहले से संपर्क कर अपडेट लें या पुनर्नियोजित तारीख का इंतजार करें।
स्रोत: अमर उजाला

