रुपईडीह। कौड़िया के लैबुड़वा गांव में रविवार सुबह 36 वर्षीय निजी लाइनमैन सीताराम गुप्ता की करंट की चपेट में आकर मौत होने से हंगामा मच गया। वह लोनियनपुरवा जाने वाली बिजली की लाइन ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़े थे और सवेरे आठ बजे हादसा हुआ।
मृतक के भाई तपसी राम ने बताया कि सीताराम करीब 15 वर्ष से लाइनमैन के अधीन काम कर रहे थे। परिवार में पत्नी सुशीला, बेटे अंशू (10), रुद्र (2) और बेटी आस्था (4) हैं। परिजनों ने घटना के बाद 50 लाख रुपये मुआवजा, पत्नी को नौकरी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की।
प्रदर्शन और मांगें
हादसे की सूचना मिलते ही ग्रामीण आर्यनगर विद्युत उपकेंद्र पहुंचे और वहां ड्यूटी पर तैनात एसएसओ दिनेश को बाहर निकालकर नियंत्रण कक्ष व मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचा तो ग्रामीण उसे लेकर आर्यनगर-करनैलगंज मार्ग पर पहुंच गए और सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन से दोनों ओर करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। पूर्व विधायक बैजनाथ दुबे व विनोद शुक्ल भी मौके पर पहुंचे और कड़ी कार्रवाई की मांग की। देर रात कटरा बाजार विधायक बावन सिंह पहुंचे और मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन व ग्रामीणों ने प्रदर्शन बंद किया।
आर्यनगर विद्युत उपकेंद्र के एसडीओ बृजेश कुमार ने बताया कि सीताराम विभाग के अधिकृत कर्मचारी नहीं थे और अनधिकृत रूप से बिजली का काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लाइन पर काम करने से पहले शटडाउन नहीं लिया गया था और घटना की जानकारी हादसे के बाद मिली।
अधीक्षण अभियंता सुशील कुमार यादव ने कहा कि लाइन पर काम करने की विभाग को कोई सूचना नहीं दी गई थी और यह भी पता लगाया जाएगा कि सीताराम किसके कहने पर खंभे पर चढ़े। उन्होंने जांच के निर्देश एसडीओ को दिए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्राथमिकी दर्ज कराने का भी आदेश दिया।
स्थानीय पुलिस थानाध्यक्ष शशि कुमार राणा और चौकी प्रभारी अखिलेश मौर्य मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने में लगे रहे। उपकेंद्र पर एहतियातन पुलिस तैनात कर दी गई है और जांच जारी है।
स्रोत: अमर उजाला

