हरदोई। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अब समूह संचालन के साथ वित्तीय लेनदेन में भी दक्ष बनाया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी जिला स्तर पर चुने गए डीआरपी (डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन) को दी गई है और वे जिले के ब्लॉकों में प्रशिक्षण कराएंगे।
प्रशिक्षण में महिलाओं को समूह की गतिविधियां संचालित करने, वित्तीय लेनदेन और उनसे जुड़े जरूरी तरीकों की जानकारी दी जाएगी। इस पहल का मकसद है कि महिलाएं अपने समूह का प्रभावी संचालन खुद कर सकें और आर्थिक मामलों में आत्मनिर्भर बनें।
प्रशिक्षण में शामिल मुख्य जिम्मेदारियां
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बनाए गए समूहों में अलग-अलग तरह की सखियों को जिम्मेदारी दी गई है। प्रशिक्षण के दौरान इन्हें समूह की बैठकें चलाने, खातों का हिसाब-किताब रखने और दूसरों को प्रेरित करने की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी।
- समूह सखी
- स्वास्थ्य सखी
- बीमा सखी
- आजीविका सखी
प्रशिक्षण के माध्यम से मूह सखी, स्वास्थ्य सखी, बीमा सखी और आजीविका सखी न केवल अपनी बल्कि अन्य समूहों की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेंगी। प्रशिक्षण में समूह की बैठक, संचालन और अन्य गतिविधियों से जुड़े जरूरी बिंदुओं पर जोर दिया जाएगा।
जिला मिशन प्रबंधक कपिल कुमार ने बताया कि डीआरपी का चयन कर ब्लॉक का आवंटन किया गया है। डीआरपी रोस्टर अनुसार अलग-अलग ब्लॉकों में प्रशिक्षण कराएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इसका लाभ उठा सकें।
स्थानीय महिला समूहों के लिए इससे ग्रामीण स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण बढ़ेगा। जो महिलाएं अब तक वित्तीय लेनदेन में अनुशासित नहीं थीं, वे प्रशिक्षण के बाद खातों का संचालन और समूह की गतिविधियों में स्वतंत्र रूप से भाग ले सकेंगी।
आगे की योजना
प्रशिक्षण के बाद डीआरपी प्रशिक्षण की मॉनिटरिंग करेंगे और आवश्यकता होने पर अतिरिक्त सत्र आयोजित किए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रशिक्षण व्यावहारिक रूप से समूहों के काम में मददगार साबित हो।
स्रोत: अमर उजाला

