हरदोई। सोमवार को रोडवेज बसों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच के दौरान कई खामियां सामने आईं। निरीक्षण में फर्स्ट-एड-बॉक्स कई बसों में नहीं मिला और इमरजेंसी गेट के ठीक सामने लगेज रखा हुआ था।
जांच में यह भी देखा गया कि कुछ बसों का इमरजेंसी बल्ब टूटा हुआ था और उसे डोरी से बांधकर किसी तरह चलाया जा रहा था। एक बस में आगे का वाइपर टूटे होने की वजह से लगातार बारिश में चालक के लिए सामने का रास्ता साफ देखना मुश्किल हो सकता है।
खामियों का असर
फर्स्ट-एड-बॉक्स न मिलने से किसी दुर्घटना या चोट की स्थिति में तुरंत प्राथमिक उपचार उपलब्ध नहीं होगा। दूसरी ओर, इमरजेंसी गेट के सामने लगेज रखा होना भगदड़ जैसी स्थिति में यात्रियों के बाहर निकलने में कुछ सेकंड की भी देरी पैदा कर सकता है।
टूटा हुआ इमरजेंसी बल्ब और डोरी से बांधा गया बल्ब संकेत देता है कि समय पर मरम्मत नहीं कराई जा रही। टूटे वाइपर के साथ बस चलने पर भारी बारिश में विजिबिलिटी घटने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है और यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
स्थानीय यात्रियों ने कहा है कि वे रोज बसों पर निर्भर करते हैं और ऐसी कमियां जानलेवा हो सकती हैं। कई लोग चाहते हैं कि ट्रैवलिंग के पहले बसों की सुरक्षा की कड़ी जांच की जाए ताकि अनावश्यक जोखिम टले।
प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि रूट पर भेजने से पहले बसों का तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा समीकरण पर कड़ाई से नजर रखी जाए। आगे क्या कार्रवाई होगी, इस पर संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण मिलने का इंतजार रहेगा।
स्रोत: अमर उजाला

