जौनपुर। जिले में यातायात नियमों के उल्लंघन पर ई-चालान की संख्या में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन जुर्माने की वसूली उतनी नहीं हो पा रही है। जनवरी से जुलाई के बीच तीनों एजेंसियों, यातायात पुलिस, थाना पुलिस और परिवहन विभाग, ने मिलाकर大量 चालान जारी किए, पर भुगतान कम मिला।
जुर्माने और वसूली
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सात महीने में कुल 1,87,704 वाहनों का चालान किया गया। इन चालानों पर कुल 23,08,10,150 रुपये का जुर्माना लगाया गया। महज़ 17,109 वाहन स्वामियों ने 1,28,06,800 रुपये ही जमा किए। यानी वसूली का अनुपात केवल 5.55 प्रतिशत रह गया। करीब 21.80 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं।
आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि औसतन प्रतिदिन लगभग 892 वाहनों का चालान किया जा रहा है। जिले में अलग-अलग स्थानों पर चेकिंग अभियान नियमित रूप से चलाए जाते हैं और नियमों के उल्लंघन पर ई-चालान काटे जाते हैं। इसके बावजूद पुरानी वसूली का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है और बकाया राशि नियंत्रण से बाहर नजर आती है।
हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट ने भी ई-चालान की बढ़ती संख्या के बावजूद कम वसूली पर चिंता जताई है। 28 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने कहा कि केवल हजारों-लाखों ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है, असल सवाल वसूली का है। अदालत ने लंबित चालानों की राशि बिजली बिल में जोड़ने, बकाया वाहनों पर पंजीकरण और अन्य सेवाओं पर रोक लगाने जैसे उपायों पर विचार के सुझाव दिए हैं।
स्थानीय यातायात विभाग अब वसूली बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। विभाग के कार्यक्रमों में सख्ती के साथ साथ सहूलियत के उपाय भी रखे जा सकते हैं ताकि वाहन मालिक समय पर जुर्माना भरें और बकाया कम हो।
आम राहगीरों और वाहन चालकों को सावधानी बरतनी चाहिए और नियमों का पालन करना चाहिए ताकि चालान न लगे और भविष्य में वसूली से जुड़ी परेशानियों से बचा जा सके।
स्रोत: अमर उजाला

