कासगंज। छह करोड़ रुपये के खर्च के बाद भी जिले की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना लागू नहीं हो सकी है। याकूतगंज गांव में मई 2025 से एसडब्ल्यूएम (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन) केंद्र बनकर तैयार है, लेकिन आवश्यक मशीनों की खरीद नहीं होने से संचालन शुरू नहीं हो पाया।
योजनाकारों ने बताया कि इस केंद्र में प्रतिदिन करीब 50 टन कूड़ा निस्तारित होना था और उपयोगी सामग्री अलग करने की व्यवस्था भी की जानी थी। कूड़ा खुले में ही डंप होने से आसपास के इलाकों में बदबू और संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
निकासी के मासिक आंकड़े
नगर पालिका परिषद के अंतर्गत अलग-अलग निकायों से मिलने वाले कूड़ा निकासी के मासिक आंकड़े भी सामने आए हैं। ये आंकड़े योजना के संचालन की जरूरत को स्पष्ट करते हैं।
- अमांपुर – 56.92 टन
- भरगैन – 116.63 टन
- बिलराम – 70.60 टन
- गंजडुंडवारा – 290.60 टन
- मोहनपुर – 26.16 टन
- पटियाली – 79.45 टन
- सहावर – 128.89 टन
- सिढ़पुरा – 90.45 टन
- सोरोंजी – 169.55 टन
- कासगंज – 683.70 टन
पिछले साल केंद्र की इमारत और बुनियादी ढांचा तैयार कर लिए गए थे। पर टेंडर के बाद मशीनों की खरीद के मामले में देरी हुई और बजट अटकने की बात कही जा रही है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और शासन से धनराशि मिलने के बाद ही संचालन शुरू करने का आश्वासन दिया गया है।
स्थानीय लोग कहते हैं कि डंपिंग एरिया के आसपास बदबू और मक्खियों से राहत नहीं मिल रही। कई परिवारों ने बच्चों और बुजुर्गों में बार-बार पेट संबंधी और श्वसन संक्रमण की शिकायतें बताईं। किसान भी कहते हैं कि गंदगी के कारण खेतों की सीमाओं तक समस्या बढ़ रही है।
निगम के अफसरों ने कहा है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई है और शासन से आवश्यक धनराशि मिलने के बाद याकूतगंज केंद्र का संचालन शीघ्र शुरू कर दिया जाएगा। इसी आश्वासन के साथ स्थानीय अधिकारियों की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
-विवेक त्रिपाठी ,ईओ नगर पालिका परिषद
स्रोत: अमर उजाला

