कासगंज। बारिश थमने के बाद भी गंगा के तटीय इलाके अब भी संकट में हैं। लगातार हो रहे कटान से आसपास की सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन गंगा की गोद में समा चुकी है और पानी तेजी से ऊंचाई पर स्थित सुन्नगढ़ी की ओर बढ़ रहा है।
कटान की भयावह तस्वीर
सुन्नगढ़ी में स्थित 80 साल पुराने प्रसिद्ध गोलामणि मंदिर व आश्रम भी खतरे में आ गए हैं। बांधों से छोड़े गए पानी के चलते नदी ने टीलों को काट कर अपना रुख उत्तर से दक्षिण की ओर मोड़ लिया है, जिससे किलौनी, किसौल और सुन्नगढ़ी के ग्रामीण चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गोलामणि का ऊंचा क्षेत्र गंगा में समा गया तो यह प्राकृतिक प्रवाह नियंत्रक खत्म हो जाएगा और इलाके की सुरक्षा प्रभावित होगी।
ग्रामीण विजेंद्र और देवेंद्र ने बताया कि पिछले वर्ष से शुरू हुआ कटान अब तक जारी है और पहले से बनाए गए सिंचाई विभाग के सुरक्षा कार्य भी ध्वस्त हो चुके हैं। वर्षों पहले अभयपुरा और भुसावली जैसे तटीय गांव गंगा में समा चुके हैं और लोगों को अन्य जगह बसाया गया था। इस बार भी कई कच्चे बांध कटान का शिकार हुए हैं और कई किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन बर्बाद हो चुकी है।
स्थानीय प्रयास और प्रशासन की कार्रवाई
ग्रामीणों ने खुद भी कटान रोकने के उपाय शुरू कर दिए हैं। बबलू, यशवीर, चरन सिंह और अन्य ग्रामीण प्रशासन से पक्के बांध निर्माण की मांग कर रहे हैं ताकि स्थायी समाधान मिल सके। सिंचाई विभाग की टीमें बृहस्पतिवार और शुक्रवार को मौके पर पहुंचीं और प्लास्टिक बैग डालकर कटान रोकने की कोशिशें तेज कर दीं।
पटियाली तहसील के बरौना गांव में पक्का बांध होने के बावजूद गंगा का प्रवाह आबादी के नजदीक बना हुआ है। ग्रामीणों ने चेताया है कि कटान नहीं रुका तो समस्या और बढ़ सकती है और बचाव कार्य कठिन हो जाएगा।
सिंचाई विभाग के अधिकारी संदीप जैन, एसडीओ, सिंचाई ने कहा, “गोलामणि पर कटान रोकने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं और यह प्रयास कारगर भी होने लगे हैं। गंगा के जलस्तर में भी कमी आ रही है, जिससे काम तेजी से करने का मौका मिल रहा है। लगातार उपाय किए जा रहे हैं।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि तत्काल जरूरत पक्के बांध और व्यापक बचाव कार्य की है। प्रशासन और किसान दोनों मिलकर तेज कदम उठाएँ तो ही इलाके की स्थिति सुधर सकती है और बचे हुए गांवों व जमीन की रक्षा संभव हो पाएगी।
स्रोत: अमर उजाला

