सिढ़पुरा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिढ़पुरा में पिछली बारish के बाद जमा हुआ गंदा पानी अभी तक नहीं निकला है। इसी वजह से सोमवार से शनिवार तक पीएचसी की ओपीडी सड़क किनारे लगानी पड़ी है और टीकाकरण भी केंद्र के बाहर कराया जा रहा है।
पीएचसी परिसर में जलभराव के चलते सामान्य उपचार व आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हैं। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को 108 एंबुलेंस के माध्यम से गंजडुंडवारा सीएचसी पर भेजना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को दूर स्थित केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है।
निकासी और प्रयास
मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर बीडीओ सिढ़पुरा की देखरेख में पिछले तीन दिनों से परिसर में बोरिंग कराई जा रही है। मकसद जमा पानी को जमीन के भीतर पहुंचाकर निकासी सुनिश्चित करना है। हालांकि शनिवार तक कराए गए सभी प्रयास असफल रहे और किसी भी बोरिंग से पानी की निकासी नहीं हो पाई।
बोरिंग विफल रहने से पीएचसी की व्यवस्थाएं पूरी तरह से सुचारू नहीं हो पा रही हैं। ओपीडी, टीकाकरण और आपात सेवाओं को बाहर चलाने से मरीजों और तीमारदारों को भारी असुविधा हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था नहीं बनी तो मरीजों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। कई परिवारों ने छोटे बच्चों और बुजुर्गों के इलाज के लिए बार‑बार गंजडुंडवारा जाना शुरू कर दिया है, जिससे खर्च और समय बढ़ा है।
चिकित्सा अधीक्षक प्रदीप गौतम के अनुसार लगातार उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया जा रहा है और आला अधिकारियों के निर्देश पर ही बोरिंग कार्य कराया जा रहा है। फिलहाल ओपीडी और टीकाकरण पीएचसी के बाहर ही किए जा रहे हैं, जबकि गंभीर मामलों को रेफर किया जा रहा है।
आगे की संभावना
जल निकासी का ठोस समाधान न मिलने तक सेवाएं इसी तरह अस्थायी रूप से बाहर चलाई जा सकती हैं। पीएचसी की पड़ी स्थिति पर स्थानीय प्रशासन से स्थायी निस्तारण की व्यवस्था करने की उम्मीद जतायी जा रही है।
स्रोत: अमर उजाला

