लखनऊ। अक्टूबर में बिजली उपभोक्ताओं के बिलों में पांच प्रतिशत से अधिक कमी आने की उम्मीद है। यह राहत मुख्य रूप से जुलाई माह के ईंधन अधिभार शुल्क में की गई कटौती के कारण संभव दिखाई दे रही है।
राज्य में कुल लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को इस कटौती का प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है। जून में जब उपभोक्ताओं से अतिरिक्त 10 प्रतिशत वसूला गया था, तब से ही बिलों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
बिलों में हाल के बदलते आंकड़े
पिछले महीनों के आंकड़ों के अनुसार जून में 10 प्रतिशत अधिक बिल वसूले गए। उसके बाद जुलाई में बिलों में कमी 4.43 प्रतिशत आई। अगस्त में यह कमी 2.92 प्रतिशत रही और सितंबर में रिकॉर्ड 7.93 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। अब अक्टूबर में पांच प्रतिशत से अधिक कमी की संभावना जताई जा रही है।
कारपोरेशन ने पुराने भुगतान को भी अधिभार में शामिल करते हुए उपभोक्ताओं से कुल 1610 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूल किए थे। आयोग ने पुराने भुगतान को अधिभार में शामिल करने पर नाराजगी जताई और उसे गलत करार देते हुए आदेश जारी किया था।
उपभोक्ता घरों और छोटे व्यापारों के लिए यह राहत महत्वपूर्ण होगी क्योंकि जून से शुरू हुई अतिरिक्त वसूली के बाद कई परिवारों पर आर्थिक दबाव पड़ा था। बिजली बिलों में गिरावट आवासीय और वाणिज्यिक दोनों वर्गों के लिए महीने भर के खर्च में सकारात्मक असर दे सकती है।
आगे क्या होगा: आयोग और कारपोरेशन के आदेशों के मद्देनजर उपभोक्ता अगले बिलों में कटौती की पुष्टि कर सकेंगे। जिन परिवारों को जून में अतिरिक्त वसूली के कारण ज्यादा चुकाना पड़ा था, उन्हें आगे के निर्देशों के अनुसार संशोधन या समायोजन दिखाई दे सकता है।
स्रोत: दैनिक जागरण

