लखनऊ। बसपा प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर तीखा निशाना साधा है और कहा है कि सपा परिवारवाद व धनबल की राजनीति करती है। उन्होंने यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश से होने वाले राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव के संदर्भ में की।
मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में अपने परिवार, सगे-संबंधियों, भाई-भतीजों, करीबी रिश्तेदारों या बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों को टिकट नहीं देती। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को उम्मीदवार बनाती है।
राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर आरोप
मायावती ने सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों पर सवाल उठाए और कहा कि इसका ताजा उदाहरण यूपी से राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में सपा द्वारा श्री रामगोपाल यादव को फिर से उम्मीदवार बनाना है। उन्होंने रामगोपाल यादव को सपा मुखिया का नजदीकी रिश्तेदार बताते हुए यह बात कही। इसी क्रम में उन्होंने सपा के दूसरे उम्मीदवार श्री धनराज परिमल नाथवानी का नाम लेकर कहा कि वे चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं।
उनका यह भी कहना था कि लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः ‘फेस सेविंग’ और चुनाव हारने के लिए होगा। मायावती ने सपा की रणनीति पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा, ‘सपा को वोट PDA का चाहिए, लेकिन सांसद और विधायक आदि ज्यादातर अपने परिवार वालों और बड़े पूंजीपतियों को बनाती है’।
मायावती ने सपा की राजनीति को पुराना दोहरा चाल बताया और कहा, ‘सपा का दोहरा चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से रहा’। उन्होंने खासकर अपरकास्ट समाज के गरीबों तथा बहुजन समाज‑दलितों, आदिवासियों, अति‑पिछड़ों, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों से विधानसभा आम चुनाव से पहले सतर्क रहने की अपील की।
अपने बयान में मायावती ने दावा किया, ‘बहुजन समाज का हित अम्बेडकरवादी BSP में ही निहित और सुरक्षित है’। उन्होंने सपा समेत अन्य राजनीतिक दावों को ‘छलावा’ बताया और लोगों से सतर्क रहने की बात दोहराई।
अब देखना होगा कि सपा इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देती है और राज्यसभा चुनावी बहस कैसे आगे बढ़ती है। स्थानीय कार्यकतार्ओं और मतदाताओं के बीच यह बयान सियासी चर्चा को और तेज कर देगा।
स्रोत: प्रभात खबर

