लखनऊ। 27 सितंबर 2026 को राजधानी में राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक दफ्तरों में तीन किस्से काफी चर्चित रहे। ये किस्से राजधानी से लेकर प्रयागराज तक चर्चा में रहे और अधिकारियों के कदम तेज हो गये।
पहला किस्सा उस नेताजी से जुड़ा है जो पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग की फाइलों में अक्सर लाइमलाइट बनते रहे हैं। उन्होंने एक सूचना बिना जांचे-परखे सार्वजनिक कर दी। थोड़ी ही देर में यह खबर राजधानी से प्रयागराज तक पहुंच गयी और खोजबीन शुरू हो गयी। जब पड़ताल में पता चला कि सूचना गलत थी तो उन्होंने संदेश डिलीट कराए और जगह-जगह पैरवी शुरू कर दी ताकि उन पर कोई कार्रवाई न हो।
मुख्य घटनाक्रम
दूसरा किस्सा एक कारोबारी समूह से जुड़ा है जो पहले भी सुर्खियों में रहा था। अब उसी समूह को लेकर विभागों में फिर से अंदरखाने चर्चा तेज है। कहा जा रहा है कि सरकार से मिलने वाली रियायत के लिए नियमों में बदलाव पर विचार चल रहा है और कंप्यूटर पर फाइलें भी चल निकली हैं। कई अधिकारी चिंतित हैं कि जल्दबाजी में दी जाने वाली रियायत भविष्य में उनके लिए समस्या बन सकती है।
तीसरा किस्सा पुलिस महकमे से जुड़ा है। कई बड़े अधिकारी तबादला सूची में अपना नाम आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एक अधिकारी कमिश्नरेट की कमान की तैयारी में व्याकुल हैं जबकि दूसरे की नजर कानून व्यवस्था संभालने पर टिकी है। समय के साथ उनकी बेचैनी बढ़ रही है और हर तरफ से फील्डिंग लागी जा रही है ताकि सूची में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
इन तीनों किस्सों का स्थानीय प्रशासन पर असर दिख रहा है। अफवाहों और अंदरूनी कानाफुसी ने जिम्मेदार अधिकारियों के कदम प्रभावित किये हैं और कई जगह फाइलों की गति तेज हुई है। जनता और संबंधित विभाग इन घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।
आगे क्या होगा यह अब देखने वाली बात है कि संबंधित विभाग और अधिकारी किस प्रकार कदम उठाते हैं। जिन लोगों के नाम तबादला सूची में दर्ज हो सकते हैं वे अपनी तैयारियों को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन की ओर से किसी आधिकारिक घोषणा पर ही स्थिति साफ होगी।
स्रोत: अमर उजाला

