लखनऊ। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने अपनी वेबसाइट पर सामग्री प्रकाशित करने की प्रक्रिया और जिम्मेदारियों का स्वरूप स्पष्ट किया है। विभाग ने बताया है कि साइट पर प्रकाशित होने वाली सामग्री के प्रकाशन से पहले एक व्यवस्थित तंत्र के तहत सत्यापन और जाँच की जाती है।
सूचना & जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी, प्राधिकरण और कार्यप्रवाह से जुड़ा यह वर्णन बताता है कि किस तरह सामग्री की समग्रता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है। विभाग ने कहा है कि वेबसाइट पर प्रकाशित होने से पहले सामग्री विभाग के भीतर से उचित प्राधिकरण प्राप्त करती है।
प्रकाशन से पहले की जांच
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रकाशित की जाने वाली हर सामग्री पूरी तरह सत्यापित की जाती है और आवश्यक जांच प्रक्रियाओं से होकर गुजरती है। इस व्यवस्था का मकसद वेबसाइट पर दी जाने वाली सूचनाओं की शुद्धता और विश्वसनीयता बनाए रखना है।
वर्तमान में प्रकाशन की प्रक्रिया में एक व्यवहारिक तरीका अपनाया गया है। नोट में कहा गया है: “वर्तमान में, प्रकाशक द्वारा सामग्री की एक स्वीकृत प्रति ईमेल के माध्यम से प्राप्त की जाती है और इसे वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाता है।”
यह व्यवस्था सरकारी सूचनाओं, योजनाओं, घोषणाओं और प्रेस नोट्स के संयमित और नियंत्रित तरीके से प्रकाशन को सुनिश्चित करती है। विभाग का यह तंत्र गलत या अपुष्ट जानकारियों के प्रसार को रोकने का एक मुख्य साधन है।
स्थानीय उपयोग और पारदर्शिता
स्थानीय नागरिकों के लिए इसका अर्थ यह है कि वेबसाइट पर जो जानकारी मिलती है, वह विभागीय जाँच से होकर आती है। इससे लोगों को सरकारी घोषणाओं और योजनाओं की अधिक विश्वसनीय जानकारी मिलने की उम्मीद बढ़ती है।
जिन पाठकों को वेबसाइट पर सामग्री प्रकाशित करने या प्रकाशन प्रक्रिया के बारे में और जानकारी चाहिए, उन्हें विभागीय निर्देशों और प्रकाशित नोटिसों को देखना चाहिए।
स्रोत: UP सूचना विभाग

