ब्रेकिंग

लखनऊ: रोज के 50-100 रुपये के छोटे खर्चें जो घर का बजट बिगाड़ते हैं

दैनिक चाय-कॉफी, दूध, सब्जी और ऑटो के 50-100 रुपये के खर्च अगर दर्ज न किए जाएं तो महीने में बड़ा वित्तीय अंतर बन जाता है।

लखनऊ: रोज के 50-100 रुपये के छोटे खर्चें जो घर का बजट बिगाड़ते हैं
फोटो: अमर उजाला

लखनऊ। घर का बजट अक्सर बड़ी आय-व्यय की सूची पर टिक कर बनता है, लेकिन असल तनाव रोज के छोटे-छोटे खर्चों से आता है। 50-100 रुपये के चाय-कॉफी, दूध, सब्जी या ऑटो-कैब के किराये जैसी चीजें अगर दर्ज न की जाएं तो महीने में यह रकम मिलकर बड़ा खर्च बन सकती है।

सबसे पहले अपनाने वाली आदत यह है कि हर खर्च को तुरंत नोट कर लें। मोबाइल के नोट्स में लिस्ट बना सकते हैं या एक्सेल शीट का इस्तेमाल कर सकती हैं। उदाहरण के तौर पर 60 रुपये का दूध, 80 रुपये की सब्जी, 120 रुपये ऑटो और 150 रुपये ऑनलाइन खरीदारी, इन सबका रोज लिखना फालतू खर्च पकड़े में मदद करेगा।

खर्चों को वर्गीकृत करें

सिर्फ रकम लिखने से यह पता नहीं चलता कि पैसा कहां ज्यादा जा रहा है। इसलिए खर्च को कैटेगरी में बांटें, घर का सामान, बच्चों का खर्च, यात्रा, बाहर का खाना और ऑनलाइन खरीदारी। महीने के अंत में जब पूरा हिसाब देखा जाएगा तो स्पष्ट होगा कि किस जगह जरूरत से अधिक पैसा जा रहा है।

नकद और डिजिटल दोनों का हिसाब रखें। आजकल छोटी-छोटी खरीदारी यूपीआई से हो जाती है, इसलिए केवल नकद का रिकॉर्ड रखना पर्याप्त नहीं है। सप्ताह में एक बार अपने बैंक खाते और यूपीआई हिस्ट्री को जरूर देखें ताकि छूटा हुआ कोई खर्च पकड़ में आ सके। नकद खर्च के लिए मोबाइल में अलग नोट या छोटी डायरी रखना सहायक होगा।

हर हफ्ते 10 मिनट की समीक्षा करें। महीने के आखिर में एक बार पूरा हिसाब देखने की बजाय हर सप्ताह 10 मिनट निकालकर देखें कि किन चीजों पर अधिक खर्च हुआ। यदि बाहर की चाय-कॉफी या ऑटो-कैब पर खर्च बढ़ रहा है तो अगले सप्ताह वहां कटौती कर सकते हैं।

छोटे खर्चों के लिए सीमा तय करना भी जरूरी है। हर छोटी चीज पर पैसा खर्च करना बंद करने की जरूरत नहीं है, पर गैर-जरूरी ऑनलाइन सामान या बाहर खाने के लिए एक महीने की अलग सीमा तय कर लें। इससे मनमाना खर्च कम होगा और बजट नियंत्रित रहेगा।

इन आसान तरीकों से घर की अर्थव्यवस्था व्यवस्थित रहती है और अनचाहे खर्चों से बचाव होता है। बस नियमित रिकार्ड रखने और समीक्षा की आदत डालनी होगी।

स्रोत: अमर उजाला

अगली खबरउत्तर प्रदेश: सूचना विभाग ने वेबसाइट सामग्री प्रकाशन का तंत्र बताया, पूर्व जाँच-अधिकार ज़रूरीउत्तर प्रदेश टाइम्स
Alok Kumar

Alok Kumar

कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।