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प्रयागराज: हाईकोर्ट ने गलत सूची पर सेवा निरस्तीग को रद्द किया, पेंशन देने का आदेश

कोर्ट ने कहा कि बिना नियमित जांच व उचित प्रक्रिया अपनाए सेवा समाप्त करना अवैध है और तीन माह में पेंशन व अन्य लाभ मिलना चाहिए।

प्रयागराज: हाईकोर्ट ने गलत सूची पर सेवा निरस्तीग को रद्द किया, पेंशन देने का आदेश
फोटो: अमर उजाला

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गलत सूची के आधार पर एक सरकारी कर्मचारी की सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा है कि बिना नियमित जांच और उचित प्रक्रिया अपनाए किसी की सेवा समाप्त करना अवैध है।

कोर्ट ने याची मोहम्मद सुहैल की याचिका स्वीकार करते हुए प्रशासन को तीन माह में पेंशन, पारिवारिक पेंशन और अन्य सभी परिणामी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने सुनाया।

नियत कारण और प्रशासन की भूल

प्रयागराज निवासी मोहम्मद सुहैल को 1994 में सीजनल कलेक्शन अमीन के रूप में नियुक्त किया गया था और 1999 में उन्हें स्थायी पद पर तैनात किया गया था। बाद में प्रशासन ने देखा कि उनकी नियुक्ति में वरिष्ठता सूची के बजाय वसूली की सूची का इस्तेमाल हुआ था। इसी आधार पर 20 नवंबर 1999 को उनकी सेवा समाप्त कर दी गई थी।

हाईकोर्ट ने नियुक्ति के स्वरूप को देखते हुए कहा कि यह स्थायी पद के विरुद्ध थी और इसलिए सेवा समाप्ति के लिए लागू 1975 की नियमावली इस मामले में लागू नहीं होती। न्यायालय ने बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया।

याची की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी रुबीना हाशमी मुकदमे में प्रतिस्थापित हुई थीं और वही लाभ पाने की हकदार मानी गई हैं। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राजकीय विभागों को ऐसा निर्णय लेते समय नियम और जांच प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

स्थानीय वकीलों का कहना है कि इस फैसले से उन सरकारी कर्मचारियों को उम्मीद मिलेगी जिनकी सेवाएं प्रक्रियात्मक खामियों के कारण समाप्त की गईं। प्रभावित परिवार अब अदालत के निर्देश के अनुसार मिलने वाले पेंशन और अन्य लाभों के लिए विभाग से संपर्क करेंगे।

अब विभाग के सामने तीन माह के भीतर आदेश लागू करने और भुगतान का पालन करने की जिम्मेदारी है। अगर आदेश का अनुपालन नहीं हुआ तो परिवार अगला कानूनी कदम उठा सकता है।

स्रोत: अमर उजाला

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Alok Kumar

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कई वर्षों से समाचार, योजना, रोजगार इत्यादि मामलों से जुड़े कार्यों में संलग्न।