प्रयागराज। गोवर्धन मठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने रविवार को नई झूंसी के श्री शिवगंगा आश्रम में शिष्यों और श्रद्धालुओं से कहा कि भारत का भविष्य सनातनी विचारधारा से जुड़ा रहेगा। वे यहां 10 दिवसीय प्रवास पर आई धार्मिक संगत को संबोधित कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।” शंकराचार्य ने यह भी कहा कि सभी के पूर्वज वैदिक सनातनी आर्य हिंदू हैं और इसलिए सनातन धर्म से अलग हुए पंथों को भी स्वयं को सनातन से संबंधित समझना चाहिए।
शिक्षा और पर्यावरण पर बातें
शंकराचार्य ने मैकाले की ‘थ्री सी’ शिक्षा पद्धति का भारत की सामाजिक और शैक्षिक व्यवस्था के लिए दुष्प्रभावी बताया। वे मानते हैं कि सनातन धर्म के सिद्धांत अपनाने से जनसंख्या नियंत्रित रहेगी और लोग सभी दुर्व्यसन से मुक्त होंगे।
प्रकृति के संरक्षण पर भी उन्होंने जोर दिया और कहा कि विकास के नाम पर प्रकृति का अंधाधुंध दोहन नहीं होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब मनुष्य स्वस्थ क्रांति का मार्ग नहीं अपनाता तो प्रकृति स्वयं क्रांति का मार्ग बना लेती है।
संगत और उपस्थित लोग
समारोह में शंकराचार्य के निजी सचिव सहित कई संत और सहयोगी मौजूद रहे। उपस्थित लोगों में विशेष रूप से ये नाम शामिल थे:
- स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती
- प्रफुल्ल ब्रह्मचारी
- हृषिकेश ब्रह्मचारी
- आदेश भूषण पांडेय
- डॉ. दिव्यकांत त्रिपाठी
- संतोष त्रिपाठी
- बीपी सिंह
- डॉ. एलएस ओझा
- मनोज त्रिपाठी
शिष्य समुदाय ने शंकराचार्य के संबोधन को ध्यान से सुना और उनके विचारों का समर्थन किया। आश्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी धर्मनीति और पर्यावरण संरक्षण की बातों पर सहमति जताई।
अगले कार्यक्रमों में शंकराचार्य के और प्रवचन और धार्मिक गतिविधियां रखी गई हैं, जिनमें स्थानीय भक्तों की भागीदारी की उम्मीद है। जो लोग आश्रम में पहुंचना चाहते हैं वे तय कार्यक्रम के अनुसार उपस्थित हो सकते हैं।
स्रोत: अमर उजाला

