प्रयागराज। धनूपुर ब्लॉक के पूरेसत्यभामा गांव में 29 सितंबर को श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया, जिसका तीसरा दिन विशेष रूप से धार्मिक रसबस में डूबा रहा। श्रीधाम वृंदावन के आचार्य शिवश्याम महाराज ने इस मौके पर प्रहलाद और ध्रुव के चरित्र का विस्तार से वर्णन किया।
आचार्य शिवश्याम ने बताया कि ब्रह्माजी से वरदान पाकर हिरण्यकश्यप अत्यंत क्रूर और अत्याचारी राजा बन गया था। उनके पुत्र प्रहलाद भगवान श्री हरि विष्णु के अनन्य भक्त थे और धर्म की राह पर अडिग रहे।
नरसिंह अवतार और प्रहलाद की रक्षा
कथा के अनुसार जब हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद का अंत करने के लिए सारी सीमाएँ पार कर दीं, तब भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर प्रहलाद की रक्षा की और अत्याचारी का संहार किया। आचार्य ने इस घटना को भक्तिपूर्ण और नीतिसम्मत संदर्भ में प्रस्तुत किया ताकि श्रोताओं को भक्ति और सत्य के प्रति प्रेरणा मिल सके।
कथा में प्रहलाद की अटूट भक्ति और ध्रुव की तपस्या दोनों के उदाहरण दिए गए। आचार्य ने इन घटनाओं से जुड़ी शिक्षाओं पर प्रकाश डाला और कहा कि सच्ची भक्ति हर कठिनाई पर विजय पाती है।
कार्यक्रम के आयोजक हृदयशंकर पांडेय व विजयशंकर पांडेय ने श्रोताओं को नेत्र धालू से कथा में भाग लेने की अपील की। उन्होंने स्थानीय लोगों से श्रद्धा के साथ कथा सुनने और धार्मिक गतिविधियों में सहभागिता करने को कहा।
स्थानीय प्रभाव और आगे की रूपरेखा
कथा में स्थानीय श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या मौजूद रही और गांव में धार्मिक वातावरण बना रहा। आयोजकों ने आगे भी ऐसे धार्मिक कार्यक्रम चलाने की बात कही है ताकि दूसरी पीढ़ी भी पारंपरिक कथाओं और धर्म के मूल्यों से जुड़ी रहे।
स्रोत: अमर उजाला

