प्रयागराज। पुरि मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा है कि हिंदुओं को अपने ऊपर होने वाले आघातों और षड्यंत्रों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। बृहस्पतिवार को झूंसी स्थित शिवगंगा आश्रम केंद्र में अपने दस दिवसीय प्रवास के दौरान उन्होंने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित की भावना से सनातन मान‑बिंदुओं की रक्षा के लिए प्रत्येक हिंदू को अपनी भूमिका तय करनी चाहिए। भजन-आराधना के समय संबंधी उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रतिदिन सवा घंटे भजन-आराधना का प्रयास किया जाए; यदि समय का अभाव हो तो 24 घंटे में कम से कम 24 मिनट पूजा-आराधना के लिए जरूर निकाला जाए।
आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश
शंकराचार्य ने जिज्ञासुओं के आध्यात्मिक, सामाजिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़े सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को तटस्थ होकर परिस्थितियों को नहीं देखना चाहिए और सनातन सिद्धांतों के अनुरूप शासन व्यवस्था स्थापित करने के प्रयत्न होने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत पर कई तरह के तंत्रों का प्रभाव है और हिंदू समाज के सामने इतनी व्यूह रचना और षड्यंत्र हैं कि समाज यह समझ नहीं पाता कि किस दिशा से आघात हो रहा है। उनके अनुसार देश पर “ईसाई तंत्र, कम्युनिस्ट तंत्र और मुस्लिम तंत्र” का प्रभाव है।
संगोष्ठियों में उनसे प्रश्न पूछने वालों में युवाओं की संख्या अधिक रहती है। शंकराचार्य ने कहा कि इस वजह से यह कहना उचित नहीं होगा कि युवा धर्म और अध्यात्म के प्रति जागरूक नहीं हैं।
इस मौके पर शंकराचार्य के निजी सचिव स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती, प्रफुल्ल ब्रह्मचारी और हृषिकेश ब्रह्मचारी आदि मौजूद रहे। शंकराचार्य का यह प्रवास जारी है और आश्रम में उनकी उपस्थिति के दौरान कार्यक्रम चल रहे हैं।
स्थानीय प्रभाव
आश्रम में पहुंचे साधक और स्थानीय लोग उनके उपदेश सुनकर प्रभावित दिखे और कई ने नियमित आराधना पर विचार प्रकट किया। आश्रम परिसर में आगामी सत्संग और भजन‑आराधना की जानकारी के लिए आयोजक उपस्थित लोगों को मार्गदर्शन दे रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला

