शाहजहांपुर। रामगंगा, गर्रा और खन्नौत नदियों में जलस्तर बढ़ने से जिले के तटवर्ती गांवों में स्थित गोशालाओं पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। रविवार से बढ़े जलस्तर के कारण कई गोशालाएं चारों तरफ पानी से घिर गई हैं और वहां रखे गोवंशीय पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था प्रभावित हुई है।
कांट क्षेत्र के बांसखेड़ा गांव में गर्रा नदी के उफान के चलते गोशाला पूरी तरह पानी में घिरती दिखी। ग्राम प्रधान माधुरी देवी ने गोशाला में रखे 400 पशुओं को गांव के ऊंचे स्थान पर बनी अस्थायी गोशाला में स्थानांतरित करा दिया। तिलहर के धन्यौरा गांव की वृहद गोशाला भी जलभराव से घिर गई है और पिछले वर्ष की तरह फिर खतरा बन गया है।
प्रभावित गोशालाओं और जगहों की स्थिति
पांच गोशालाएं पूरी तरह खाली कराई गईं और एक अन्य गोशाला से भी पशुओं को हटाया जा रहा है। गोशाला चारों ओर पानी भर जाने से खेतों से हरा चारा लाने में कठिनाई आ रही है। वहां तैनात चौकीदार और कर्मचारी फिलहाल गोवंश को भूसा, चोकर और पानी मिलाकर खिलाकर रख रहे हैं।
प्रशासन ने प्रभावित स्थानों की जानकारी इस प्रकार दी है:
- बांसखेड़ा: 400 पशु अस्थायी गोशाला में स्थानांतरित
- धन्यौरा (तिलहर): गोशाला जलमग्न
- अमौरा, चक बरेंचा, सिमरा, भवानीपुर, समधाना: गोशालाओं से पशु हटाए गए
- एक अन्य गोशाला से भी पशु हटाये जा रहे हैं
तहसीलदार अजहर अंसारी ने कहा कि कर्मचारियों को पशुओं के लिए चारे-पानी की पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। एसडीएम सदर अतुल कुमार सिंह ने बताया कि गोशाला के अंदर ही भूसा, चोकर समेत अन्य चारे की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है और गोशालाओं पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
सीडीओ उत्कर्ष द्विवेदी ने प्रशासनिक कदमों का जिक्र करते हुए कहा, “सीवीओ, प्रधानों व सचिवों को निर्देशित किया गया है कि पशु चिकित्सक नियमित रूप से पशुओं का परीक्षण करें। चारे-पानी की व्यवस्था समुचित रखी जाए।” अधिकारियों ने कहा कि मौके पर निगरानी बढ़ा दी गई है और जरूरत के अनुसार और व्यवस्थाओं को लागू किया जाएगा।
स्थानीय लोग चारे की कमी और गोशालाओं के जलमग्न होने से चिंतित हैं। प्रशासन आगाह करता रहा है कि नदी किनारों पर रहने वाले लोग सतर्क रहें और आवश्यक होने पर ऊँचे स्थानों पर पहुंच जाएँ। अगले कुछ दिनों में मौसम और नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।
स्रोत: अमर उजाला

