बाराबंकी/सूरतगंज। एक सप्ताह तक शांत रहने के बाद सरयू नदी फिर उफन पड़ी और रामनगर के हेतमापुर में नदी ने बड़ा नुकसान किया। रविवार को यहां 150 साल पुरानी उधिया मस्जिद और 14 मकान नदी की तेज धार में समा गए।
हेतमापुर के ग्रामीणों ने बताया कि कुछ मकान पूरी तरह पानी में चले गए तो कुछ कटे किनारे पर लटक गए हैं। कटान के कारण पास के पशु चिकित्सालय की बाउंड्रीवाल भी बह चुकी है और भवन कटान के मुहाने पर पहुंच गया है। रामनगर का सुंदरनगर इलाका पानी से घिर गया है।
किस इलाकों में खतरा
नदी के दूसरे छोर पर बसे पूरनपुर गांव में दहशत का माहौल है, जहां छह आशियाने पहले ही बह चुके हैं। प्रशासन ने बताया है कि रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र के करीब 50 गांवों में बाढ़ का खतरा फिर मंडरा गया है। कंट्रोल रूम और नदी किनारे गांवों की निगरानी तेज कर दी गई है।
हेतमापुर के राजाराम ने कहा कि करीब एक महीने से सरयू कटान कर रही है। वे बताते हैं कि करीब 18 दिन पहले नदी ने करीब 30 घर, दूरसंचार केंद्र और एक मंदिर को बहा लिया था। 20 सितंबर के बाद जलस्तर खतरे के निशान से करीब 98 सेमी नीचे तक पहुंच गया था, लेकिन शनिवार से नदी का रुख फिर बदल गया।
रविवार को हे तमापुर में पानी में फंसे लोगों में राजाराम, श्रीराम, शोभाराम चौहान, मुस्ताक, विनोद, मैकू, संतोष, उत्तम, शिवनरायण, जगदीश, इब्र्राहिम, अमीन, बड़कऊ, महेेंद्र, शोभाराम वर्मा और अहमद अली शामिल हैं। कई परिवार मकानों की ईंटें निकालकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुटे रहे।
एडीएम निरंकार सिंह, बाढ़ खंड के अधिकारी शशिकांत सिंह और एसडीएम रामनगर आकांक्षा गुप्ता मौके पर पहुंचे। एडीएम ने बताया कि प्रशासनिक टीम घटना स्थल पर मौजूद है और बाबा नारायण दास धाम को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोग डर के साये में हैं और कई परिवार पारंपरिक आवास छोड़कर अस्थायी ठिकानों की ओर चले गए हैं। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है और आगे भी निगरानी जारी रखने को कहा है।
स्रोत: अमर उजाला

