सिद्धार्थनगर। नेपाल के रूपनदेही जिले की पुलिस ने मंगलवार को ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की और तीन तस्करों को दबोच लिया। कार्रवाई में भारी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद हुईं, जिससे इस इलाके में तस्करी के रुख में बदलाव का संकेत मिलता है।
तस्करी का नया स्वरूप
स्थानीय जानकारों का कहना है कि इलाके में पहले सिरप और चरस के रूप में तस्करी होती रही, लेकिन हाल की सख्ती और धरपकड़ के बाद तस्करों ने नशीले इंजेक्शन की डिलीवरी शुरू कर दी है। पकड़े गए तस्करों के कब्जे से मिली दवाएं नेपाल में प्रतिबंधित हैं और इन्हें बड़ा मुनाफा देखकर निर्यात किया जा रहा था।
रूपनदेही पुलिस की कार्रवाई में जिन दवाओं का जिक्र किया गया है, वे इस प्रकार हैं:
- 1100-1100 एम्प्यूल फेनेरगन
- 1100-1100 एम्प्यूल डायजेपाम
- 1100-1100 एम्प्यूल ब्रूफिन
पकड़े गए तस्करों में दो भारतीय नागरिक महाराजगंज के निवासी और एक नेपाल का निवासी बताया गया है। पुलिस ने बताया कि जब जवानों ने पकड़ने का प्रयास किया तो आरोपियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने पहले हवाई फायरिंग की और फिर सीधी फायरिंग की, जिसमें रोहिणी ग्रामीण नगर पालिका नंबर दो खुरहुरिया निवासी विशाल यादव के बाएं पैर में गोली लगी। उसे तत्काल भैरहवा स्थित भीम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है और वहां उसका इलाज चल रहा है।
सीमावर्ती इलाके के लोग बताते हैं कि सीमा पर चिकित्सा सामग्री बेचने वाले मेडिकल स्टोर और कुछ दुकानों की मदद से यह नेटवर्क संचालित होता है। नेपाल की डिमांड के मुताबिक यहां से सप्लाई दी जाती है और भुगतान क्रेडिट पर होने के कारण व्यापार बड़े पैमाने पर चलता है। सिद्धार्थनगर जिले की सीमा नेपाल से करीब 68 किलोमीटर तक लगती है और दवाओं की तस्करी के मामले यहाँ अकसर सामने आते रहे हैं।
आगे की कार्रवाई
नेपाल पुलिस अब तक यह पता नहीं लगा पाई है कि यह नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा था और किन जनपदों से तस्कर सीमा पार कर रहे थे। जिले की और सुरक्षा एजेंसियां भी इस पर निगरानी बढ़ा रही हैं। पिछले दो माह में बाॅर्डर पर कोडिनयुक्त कफ सिरप भी बरामद हुआ था और मामले की जांच जारी है।
स्रोत: अमर उजाला

