हसनपुर। तहसील के करीब 25 गांवों के पास गंगा नदी के रुख बदलने से तटीय इलाकों में चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो वर्षों में नदी ने तटबंध की दिशा में व्यापक कटान किया है।
सिंचाई विभाग के निरीक्षण में पता चला है कि 2025 व 2026 के सेटेलाइट चित्रों के अध्ययन से गंगा की मुख्य धारा सतेड़ा तटबंध की ओर मुड़ी मिली। दो साल में कुल मिलाकर करीब 1700 मीटर कटान हुआ है। गंगानगर, सिरसा गुर्जर की मढैया, दियावली, सतेड़ा और मटैना सबसे ज्यादा प्रभावित स्थान हैं।
निरीक्षण और रिपोर्ट
शुक्रवार को सिंचाई कार्य मंडल मुरादाबाद के अधीक्षण अभियंता राजीव मित्तल और बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने प्रभावित इलाके का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल कटान कुछ समय के लिए रुक गया है, लेकिन अगर यह फिर सक्रिय हुआ तो तटबंध को अगले वर्ष भारी नुकसान हो सकता है। वर्तमान में गंगा सतेड़ा‑दियावली से महज 600 मीटर की दूरी पर बह रही है।
संभावित खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है और तटबंध की रक्षा के लिए तकनीकी प्रस्ताव भी तैयार किए गए हैं। बचाव परियोजना में परक्यूपाइन स्टड और जियोट्यूब तकनीक से काम करने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि कटान रोका जा सके।
एसडीएम हिमांशु उपाध्याय ने कहा कि बड़ी परियोजना के लिए बाढ़ खंड ने शासन को रिपोर्ट भेजी है और वहां से निर्देश मिलने पर कार्य शुरू किया जाएगा।
राजेश गंगवार, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड, अमरोहा ने बताया, “पिछले दो तीन सालों में हसनपुर क्षेत्र में कटान ज्यादा हुआ है। भविष्य के खतरे को भांपते हुए इस पर कार्य करने के लिए मंथन चल रहा है।”
स्थानीय असर और आगे की कार्यवाही
किसानों को अपने खेतों के पास जलस्रोत और कटान से संबंधित नुकसान की चिंता सताने लगी है। सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन ने कहा है कि जल्द संभावित बचाव कार्यों के लिए तकनीकी और वित्तीय सहमति ली जाएगी। स्थानीय लोगों को अलर्ट रखा गया है और आवश्यकतानुसार खेतों से दूर रहने के निर्देश दिए जाएंगे।
स्रोत: अमर उजाला

