गोंडा। करीब 30 साल पुराना नजूल भूमि विवाद सोमवार को सुलझ गया। वादी छावनी सरकार आनंदपुरी सिविल लाइंस निवासी दयानंद मिश्र ने दीवानी न्यायालय में शपथपत्र दाखिल कर आगे मुकदमे की पैरवी नहीं करने और कार्यवाही समाप्त करने का अनुरोध किया।
मामला सिविल लाइंस क्षेत्र के उस भूखण्ड से जुड़ा था जो मंडलायुक्त कार्यालय और उसके भवन के लिए आरक्षित था। वर्ष 1997 में इस संबंध में सिविल न्यायालय में मुकदमा दायर हुआ था और करीब तीन दशक से यह केस अदालतों में लंबित रहा।
जांच और प्रशासन की कार्रवाई
मंडी में मई 2026 में पद संभालने के बाद मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने पुराने कब्जे के मुकदमों की समीक्षा कराई। प्रशासन ने अभिलेख और न्यायालय में चल रही कार्यवाही का परीक्षण कर सरकारी पक्ष को मजबूत रखने के निर्देश दिए थे। जांच में पाया गया कि विवादित भूमि पर ‘ज्योति विद्या मंदिर’ नाम से एक विद्यालय संचालित था।
मौके पर जब जांच कराई गई तो वहां न तो विद्यार्थी थे और न शिक्षक। प्रशासन ने उपलब्ध जानकारी और सबूतों के आधार पर मुकदमे के पक्षकार से आगे की कार्रवाई बंद कराने का अनुरोध किया, जिसके बाद वादी ने शपथपत्र देकर अपना कब्जा भी हटा लिया।
मामला कोर्ट सिस्टम में भी गरमा गया था जब इसकी सुनवाई के दौरान जुलाई में मंडलायुक्त और सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान के बीच फोन पर हुई बातचीत को लेकर विवाद उठा। जज ने जिला जज को पत्र लिखा और बाद में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ पीठ ने अगस्त में इस बात को गंभीरता से लेकर आपराधिक अवमानना के स्तर पर विचार के निर्देश दिए थे।
मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा, “शासकीय भूमि का संरक्षण और जनहित में उसका उपयोग प्रशासन की प्राथमिकता है।” उन्होंने बताया कि संबंधित पक्ष ने अदालत में आगे पैरवी नहीं करने का अनुरोध किया है और कब्जा हटा लिया गया है।
अगले कदम के रूप में प्रशासन इस जमीन को सुरक्षित रखकर निर्धारित शासकीय प्रयोजन के लिए उपयोग सुनिश्चित करेगा। मंडलायुक्त ने जिले के अन्य मामलों में भी प्रभावी पैरवी कर निस्तारण कराने के निर्देश दिए हैं।
स्रोत: अमर उजाला

