इलाहाबाद हाईकोर्ट की नसीहत : जिला अदालतें जमानत देते समय न लगाएं मुश्किल शर्तें, जानिए और क्या कहा

UPT | इलाहाबाद हाईकोर्ट

Sep 09, 2024 14:39

हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक विशेष मामले की सुनवाई के दौरान की है। जिसमें आगरा के अरमान की जमानत अर्जी पर विचार किया गया। जज अजय भनोट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट की जिम्मेदारी है कि जमानतदार तय करते समय अभियुक्त की सामाजिक-आर्थिक स्थिति...

Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालतों को जमानत देने को लेकर नसीहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि जमानत शर्तें इस प्रकार नहीं होनी चाहिए कि जिनका पालन अभियुक्त के लिए असंभव हो, विशेषकर जब अभियुक्त की सामाजिक-आर्थिक स्थिति कमजोर हो। यह आदेश ऐसे मामलों में लागू होगा जहां जमानत की शर्तों को पूरा करने में अभियुक्त की स्थिति उनके सामाजिक-आर्थिक हालात के चलते संभव नहीं हो पाती।

जिला अदालतें जमानत देते समय न लगाएं मुश्किल शर्तें
हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक विशेष मामले की सुनवाई के दौरान की है। जिसमें आगरा के अरमान की जमानत अर्जी पर विचार किया गया। जज अजय भनोट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट की जिम्मेदारी है कि जमानतदार तय करते समय अभियुक्त की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि शर्तें ऐसी न हों जिनका पालन न हो पाने के कारण जमानत का उद्देश्य ही विफल हो जाए।

हाईकोर्ट ने अरमान को दी जमानत
अरमान 13 सितंबर 2020 से जेल में था। उस पर यूपी गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज था। उसने अपनी जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से संपर्क किया था क्योंकि निचली अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने देखा कि अरमान ने अपने आपराधिक इतिहास को सही तरीके से प्रस्तुत किया है और उसने जांच और मुकदमे की प्रक्रिया में पूरा सहयोग किया है। इसके आधार पर कोर्ट ने अरमान को जमानत प्रदान कर दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आगरा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) यह सुनिश्चित करे कि अरमान को जमानत पर रिहाई के लिए आवश्यक कानूनी सहायता प्रदान की जाए। इसमें जमानत राशि जमा करने और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए सहायता शामिल है। 

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