बलिया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश की राजनीति में दशकों से सक्रिय रहे। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर कई बार विधानसभा तक पहुँचा।
चौधरी आठ बार विधायक चुने गए। वे 1977 में पहली बार चिलकहर से जनता पार्टी के टिकट पर विजयी हुए थे। 2012 और 2017 में बांसडीह से जीत के साथ उन्होंने फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें 51,201 वोट मिले जबकि निर्दलीय प्रत्याशी केतकी सिंह को 49,574 वोट मिले थे और चुने जाने के बाद उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था।
शुरुआती जीवन और शिक्षा
राम गोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1953 को बलिया जिले के गोसाईंपुर गांव में हुआ। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई गांव के प्राथमिक विद्यालय में हुई और बाद में उन्होंने उच्चतर माध्यमिक शिक्षा पूरी की। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर से स्नातक और लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री लेकर वकालत शुरू की।
राजनीति से जुड़ाव छात्र जीवन से ही रहा। वर्ष 1971-72 में वे मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय, बलिया के महामंत्री चुने गए और बाद में कॉलेज के अध्यक्ष भी रहे। 1977 में पहली जीत के बाद उन्होंने लगातार कई पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की।
सरकारी जिम्मेदारियाँ और मंत्री पद
दिसंबर 1990 से 1991 के बीच राम गोविंद चौधरी मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री रहे। 1989 और 1991 के चुनावों में भी वे जीत कर विधानसभा पहुँचे। 2002 में वे विधानमंडल दल के नेता चुने गए थे।
1993 में चिलकहर सीट से हार का सामना हुआ, जबकि 1996 में उनका प्रदर्शन चौथे स्थान पर रहा। 2007 में बांसडीह से वे केवल 488 वोटों के अंतर से हार गए थे, लेकिन 2012 में वापसी कर उन्होंने फिर जीत दर्ज की और बाद में मंत्री बनाये गए।
चौधरी का राजनीतिक करियर क्षेत्र के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर असर डालता रहा। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव से स्थानीय सियासत और पार्टी संगठन में उनकी गहरी पकड़ रही। आने वाले दिनों में स्थानीय नेता और पार्टी कार्यकर्ता उनके राजनीतिक योगदान पर चर्चा करेंगे।
स्रोत: अमर उजाला

