बुलंदशहर। शेयर आवंटन के नाम पर उपभोक्ताओं से रकम लेकर धोखाधड़ी और सेवा में लापरवाही करने वाली नई दिल्ली की कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग ने निर्णायक कदम उठाया है। आयोग ने मैसर्स कि-फार्मा लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को पीड़िता को पूरी राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
जन सूचना अधिकारी शेखर वर्मा ने बताया कि मोहल्ला शीतलगंज निवासी लाज शर्मा ने 10 जून 1995 को कंपनी के कॉल मनी अकाउंट में 10 रुपये प्रति शेयर की दर से 2,500 शेयरों के लिए कुल 25,750 रुपये जमा कराए थे। मामले की सुनवाई करते हुए आयोग ने यह माना कि कंपनी ने पैसा लेकर न तो शेयर स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराए और न ही किसी प्रकार का लाभांश दिया।
मंजूर किए गए दावे और दंड
आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश हसनैन कुरैशी और महिला सदस्य नीलम कुमारी ने कंपनी के तर्क खारिज कर दिए और इसे सेवा में भारी कमी व अनुचित व्यापार पद्धति करार दिया। आदेश में कहा गया है कि प्रबंध निदेशक 45 दिनों के भीतर 10 जून 1995 की तारीख से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 25,750 रुपये वापस करें।
इसके अलावा आयोग ने मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 10,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 10,000 रुपये कंपनी से वसूलने का निर्देश दिया है। अगर निर्धारित 45 दिन के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो समस्त देय राशि पर 13 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगने का प्रावधान रखा गया है।
पीड़िता के पति मुकुल शर्मा ने कंपनी से बार-बार संपर्क करने पर नए निर्गम और धन की सुरक्षा का आश्वासन पाया, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं दिखा। 2015 में भेजे गए कानूनी नोटिस का भी कोई जवाब नहीं मिला, तब पीड़िता ने सेबी और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय से शिकायत की थी।
स्थानीय असर और आगे की प्रक्रियाएं
आदेश से स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि वर्षों पुराने ऐसे मामले अब निष्पक्ष ढंग से सुलझेंगे और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा होगी। तय समय में भुगतान न होने पर दंडात्मक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, जिससे कंपनी पर आगे की कार्रवाई संभव होगी।
स्रोत: अमर उजाला

